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20 जून से पहले धान लगाने पर रोक, किसान :1 से शुरू करेंगे

3 वर्ष पहले
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धान की रोपाई को लेकर किसानों व प्रशासन के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन ने धान की बिजाई पर 20 जून से पहले रोक लगा दी है। लेकिन किसान 1 जून से धान की बिजाई करने पर अड़ गए हैं। इसके लिए वह गांवों में बैठकें कर किसानों को लामबंद कर रहे हैं। साथ ही सरकार को उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके कामों में दखल देने की कोशिश की गई तो वह संघर्ष को मजबूर होंगे। जिला प्रशासन ने विशेष प्रेस नोट जारी करके किसानों से अपील की है कि धान कि बिजाई 20 जून से पहले ना करें, साथ ही कहा गया है कि जो 20 जून से पहले धान की बिजाई करेगा उस पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। खेतीबाड़ी विभाग की तरफ से उसकी धान पर हल चलाया जाएगा और उसे जुर्माना भी किया जाएगा। वहीं किसानों ने इस मुद्दे को लेकर गांव चीमा में बैठक करके किसानों को लामबंद किया। किसानों ने कहा कि सभी एकजुट होकर धान की बिजाई जल्द शुरू करेंगे। अगर किसी ने गांव में आने की कोशिश की तो उसके खिलाफ डट जाए। वहीं भाकियू डकौदा के जिला प्रधान दर्शन सिंह उगोके, लखवीर सिंह, हरचरण सिंह सुखपुर, जगराज सिंह, संदीप सिंह ने कहा कि 1 जून से पहले ही धान लगाया जाएगा। अगर उनके काम के बीच दखल अंदाजी की कोशिश हुई तो टकराव होगा।

बैठक कर किसानों को लामबंद करते हुए किसान नेता।

समय से पहले बिजाई करने पर होगी कार्रवाई : रछपाल

चीफ एग्रीकल्चर अफसर रछपाल सिंह ने कहा कि पानी को बचाने के लिए यूनिवर्सिटी के निर्देश पर ही नियम बनाए गए हैं। किसान 20 जून से पहले धान ना लगाएं। इसकी किसानों को अपील की जाएगी। अगर नहीं माने तो कार्रवाई होगी।

कृषि विभाग का तर्क

20 जून से पहले हवा में नमी की मात्रा कम होती है। जिसके चलते धान के खेत को लगाया गया पानी हवा में उड़ता है। भूमिगत पानी पहले ही नीचे चला गया है।

मौसम विभाग के अनुसार केरल में 28 मई को मानसून आ जाएगा। पंजाब में उससे करीब एक महीने बाद 28 जून को आएगा। अगर 20 जून से धान लगेगा तो मानसून का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल हो सकेगा। उस वक्त हवा में मनी का मात्रा अधिक होने के कारण पानी भी नहीं उड़ेगा।

किसानों का तर्क

20 जून को एक साथ धान की बिजाई शुरू होने के कारण लेबर के रेट तीन गुणा हो जाते हैं।

20 जून को लगाया धान अक्टूबर के अंत तक नहीं काटा जाता,उसमें मनी बढ़ जाती है।

कटाई के बाद नमी के कारण पराली जलाते वक्त धुआं होता है।

अगर सरकार पानी बचाने की इच्छुक है तो किसानों को फसली चक्कर से निकालने के लिए सब्जियों का मंडीकरण करे। किसान धान की खेती ही करना बंद कर देंगे।

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