सीजन बीत गया, लेकिन 41 फड़ों में तेंदूपत्ता की खरीदी ही शुरू नहीं हुई
नक्सली दहशत के चलते दंतेवाड़ा वन मंडल के 131 में से 41 फड़ों में इस साल के सीजन में एक भी गड्डी तेंदूपत्ता नहीं खरीदा जा सका है। वहीं नए निकले पत्तों के परिपक्व होकर कड़ा हो जाने से फड़ों में खरीदी पूरी तरह बंद कर दी गई है, यानी खरीदी का यह सीजन बंद हो गया। इस वजह से वन मंडल में निर्धारित लक्ष्य के बराबर भी तेंदूपत्ता नहीं खरीदा जा सका। इस साल के सीजन में दंतेवाड़ा वनमंडल में 7 समितियों के जरिए 131 फड़ों में कुल 19 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन अब तक केवल 13062.189 मानक बोरा तेंदूपत्ता ही खरीदा जा सका। एसडीओ फारेस्ट एनसी देशलहरा के मुताबिक नक्सलियों ने कटेकल्याण, कुआकोंडा ब्लॉक में खरीदी करने ही नहीं दिया। इस बार संग्रहण का पारिश्रमिक 180 रुपए प्रति सैकड़ा तेंदूपत्ता से बढ़ाकर 250 रुपये करने के बावजूद ग्रामीण इसका लाभ लेने से वंचित रह गए।
मौसम और विकास यात्रा भी बाधक बने खरीदी में
जिन इलाकों में तेंदूपत्ता की अच्छी आवक होने लगी थी, वहां तेंदूपत्ता खरीदी में खराब मौसम और विकास यात्रा भी बाधक बन गए। खराब मौसम और अंधड़ के चलते 3-4 दिन खरीदी बंद की गई।
इसके बाद 12 मई को हुई विकास यात्रा में ग्रामीणों की भीड़ जुटाने के लिए 10 से 12 मई तक खरीदी बंद रखी गई, ताकि ग्रामीण सभा में शामिल होने जा सकें। इसके बाद फड़ों में पत्ते कड़ा होने का हवाला देकर खरीदी बंद कर दी गई।
बारसूर व दंतेवाड़ा में खरीदा गया तेंदूपत्ता
बारसूर व दंतेवाड़ा इलाकों में निजी ठेकेदारों ने खरीदी की तो यहां आसानी से तेंदूपत्ता खरीदा जा सका। कुल 7 समितियों के 79 फड़ों में ठेकेदार के जरिए खरीदी की गई। बाकी 52 फड़ों में सरकारी खरीदी होनी थी, लेेकिन नक्सली दहशत के चलते 41 फड़ों में खरीदी नहीं हुई। इसमें से कटेकल्याण समिति की एक भी फड़ में खरीदी नहीं हुई। नकुलनार समिति के 4 फड़ में और मोखपाल समिति के मात्र एक फड़ मोखपाल में तेंदूपत्ता खरीदा जा सका।