संत लोकेशानंद महाराज द्वारा सत्य नारायण धर्मशाला बाड़ी में दूसरे दिन श्रद्धा, विश्वास, सुख और दुख पर प्रवचन देते हुए, भक्तगणों से कहा कि कलयुग में धर्म और मानवता का नाश हो रहा है। ऐसे में संतों एवं विद्वानों का दायित्व है कि समाज में हो रहे धर्म और मानवता के विनाश को पुनः स्थापित करना होगा। उन्होंने कहा कि इस सब का सबसे अच्छा माध्यम है सत्संग। सत्संग के माध्यम से हमें समाज को जागृत करना होगा। आज कलयुग में हमारे धर्म ग्रंथों की सुनियोजित तरीके से निंदा हो रही है। उसे रोकना होगा। कलयुग में रामायण का उपयोग ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। क्योंकि रामायण साक्षात प्रयोग है। इसकी प्रत्येक चौपाई जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। जब हमारी गृहस्थ रूपी नौका में ज्वार भाटा आता है। जीवन रूपी नौका भंवर में फंसती है। तभी केवल परमपिता परमात्मा का ध्यान करते हैं और वह ध्यान ही हमें उस भंवर से बाहर निकालता है। ऐसे में हमें उस परमपिता परमात्मा का सदैव स्मरण करते रहना चाहिए। निश्चित रूप से जीवन में कोई परेशानी आ ही नहीं सकती। केवल परेशानी में ही हम स्मरण करें। यह ठीक नहीं है। हर व्यक्ति के जीवन में सुख एवं दुख की लहर चलती रहती है। व्यक्ति को सुख में परमात्मा से दूर नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा करोगे तो दुख में परमात्मा पास कैसे होंगे। उन्होंने कहा कि सुख-दुख व्यक्ति की संपत्ति है। सुख में आशक्त होना ठीक नहीं है। दुख हमारा परम हितैषी है। क्योंकि हमें परमात्मा से जोड़े रखता है। संतों का आभूषण है। उन्होंने महाभारत का दृष्टांत देते हुए कहा कि जब श्री कृष्ण ने कुंती से पूछा कि आपको क्या चाहिए। कुंती ने बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि मुझे सिर्फ श्री कृष्ण चाहिए। संत जी ने भक्तों से हर हाल में परमपिता परमात्मा के लिए समर्पित रहने को कहा। प्रवचन कार्यक्रम में मुरारी लाल शर्मा, सुरेश भारद्वाज, रवि कुमार शर्मा, अनिल कुमार शर्मा आिद मौजूद थे।
बाड़ी. प्रवचन पांडाल में उपस्थित महिला जनसमूह।
शांति के लिए गायत्री मंत्र का जाप करें
भास्कर संवाददाता | बसई नवाब
ग्राम पंचायत नगला हरलाल के गांव जागीरपुरा कुशवाह के हनुमान मंदिर पर आज से चार दिवसीय नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक अतर सिंह कुशवाह ने बताया कि सुबह 9 बजे से 11 बजे तक नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन होगा । कार्यक्रम के प्रथम दिन कथा वाचक दीनदयाल गायत्री शक्तिपीठ हरिद्वार द्वारा प्रवचन दिए गए। इस मौके पर उपस्थित महिलाएं एवं पुरुषों से कथा वाचक ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में जाने-अनजाने मे कई पाप कर जाता है। इसीलिए उन पापों का नाश करने के लिए मनुष्य को गायत्री महामंत्र का जाप करना चाहिए। कथा सुनने के लिए हनुमान मंदिर पर काफी संख्या में महिला एवं पुरुष मौजूद थे। कथा के अंत में आरती कर भक्तों को प्रसादी वितरित की। रात्रि को हनुमान जी के मंदिर पर भजन, कीर्तन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन गायत्री परिवार प्रज्ञा मंडल बसई नवाब के सहयोग से किया जा रहा है।