कैथूदा पंचायत के बटावती गांव में गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ कार्यक्रम हुआ। बाद में रामदेव मंदिर में मूर्ति स्थापना व कलशारोहण हुआ। सकल बैरवा समाज की ओर से बाबा रामदेव मंदिर में दूसरे दिन गुरुवार को सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुए यज्ञ में यजमानों ने आहुतियां दी। प्राण-प्रतिष्ठा कर मंदिर में बाबा रामदेव की मूर्ति स्थापित की गई। वहीं मंदिर में कलशारोहण किया। प्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इससे पहले विभिन्न बोलियां लगाई गई। प्रधान कुंड की बोली प्रभुलाल, सूर्य कुंड की बोली रमेशचंद, चंद्रकुंड की राकेश, इंद्रकुंड की भैरुलाल, दुर्गाकुंड की सुखपाल, घोड़ी की रामफूल के नाम छूटी। दो दिवसीय मंदिर डोरा धार्मिक कार्यक्रम में समाजबंधुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
तिथिबंधन की पूर्णाहुति पर दी यज्ञ में आहुतियां
बसोली| सथूर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर अजमेरा के मोहल्ले में माली समाज की ओर से देवनारायण भगवान का वार्षिक तिथिबंधन पूर्णाहुति कार्यक्रम गुरुवार को संपन्न हुआ। इस मौके पर ग्रामीणों ने हवन कुंड में आहुतियां दी। बाद में महाआरती व प्रसादी वितरण किया गया। इसमें कस्बे सहित दूरदराज से बड़ी संख्या में माली समाज व अन्य समाज के लोगों ने भाग लिया। समाज अध्यक्ष तुलसीराम सैनी ने बताया कि बुधवार को धूमधाम से देवनारायण मंदिर स्थल से कलशयात्रा निकाली गई थी, जिसका जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। वहीं रात को भजन संध्या हुई।
करवर। बटावती गांव में मंदिर डोरा कार्यक्रम में हवन यज्ञ करते श्रद्धालु।
बसोली। सथूर में देवनारायण मंदिर में यज्ञ में आहुतियां देते श्रद्धालु।
भागवतकथा में गोवर्धन पूजा का बताया महत्व: तालेड़ा| नोताड़ा भोपत के चारभुजा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को पं. ऋषिराज शास्त्री ने गोवर्धन पूजा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन का अर्थ है गौ संवर्धन। जब गाय नहीं होगी तो गोपाल कहां होंगे। गोसेवा मनुष्य का परम धर्म है। गोमाता की कृपा से ही उस पर्वत का नाम भी गोवर्धन हो गया, जिसको भगवान कृष्ण ने उठाया था। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत इसलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गो संवर्धन से ही हो सकता है। हम बिना कर्म करें फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा। कथावाचक ने गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि इंद्र के कुपित होने पर कृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें बृजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। कथा में गिरिराज पर्वत की झांकी सजाई एवं छप्पन भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की। कथा में मंदिर संचालक अध्यक्ष रामचंद्र राठौर, सरपंच देवलाल गुर्जर, पूर्व सरपंच मनभर बाई गुर्जर, बद्रीबाई मीणा, दुर्गालाल मौजूद रहे।