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पीने योग्य नहीं है जिले के आधे जल स्रोत

3 वर्ष पहले
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भूमिगत जल के अंधाधुंध दोहन के चलते जिले में पीने योग्य पानी काफी नीचे चला गया है। अनवरत गिरता भूजल स्तर लोगों के सामने ना केवल पीने के पानी का संकट खड़ा कर रहा है अपितु ये लोगों में कई बीमारियों और शारीरिक अक्षमताओं का कारण भी बन रहा है। दिनोदिन गिरते भूजल स्तर के कारण जिले के आधे से ज्यादा पेयजल स्रोतों में फ्लोराइड, नाइट्रेट जैसे तत्वों की मात्रा अपने तय मानकों के कही ज्यादा हो गई है।

केेंद्रीय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत करवाई गई जांच में ये आंकडे सामने आए। इस दौरान पूरे देशभर से करीबन 53 लाख से अधिक सैम्पल्स लिए गए। अकेले राजस्थान में करीब पांच लाख जल स्रोतों के सैम्पल लिए गए। इनमें से 2.45 लाख सैम्पल्स में इन तत्वों की मात्रा मानक स्तर से अधिक पाई गई। अब सरकार द्वारा जल अमृत योजना के तहत जयपुर जिले में 12 स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत आरओ प्लांट लगवाए गए है, जहां बेहद रियायती दर पर लोगों को पीने के लिए साफ पानी मुहैया करवाया जाएगा।

बस्सी में 21 ग्राम पंचायतों में आधे से ज्यादा सैम्पल फेल

जांच के दौरान बस्सी पंचायत समिति में कुल 6616 सैम्पल लिए गए थे जिनमें से 3193 सैम्पल फेल हो गए थे। इनमें से 240 सैम्पल्स में फ्लोराइड, 535 में नाइट्रेट, 217 में अल्केलिनिटी, 38 में क्लोराइड, 281 में पीएच तथा 176 सैम्पल्स में टीडीएस तय मानकों से अधिक पाया गया। जांच के दौरान ग्राम पंचायत बडवा, बैनाडा, भटेरी, बूडथल, करणगढ़, काशीपुरा, पालावाला जाटान एवं रामरतनपुरा में 50 प्रतिशत से अधिक तथा अणतपुरा, जीतावाला, कचौलिया, माधोगढ, मोहनपुरा, पडासौली एवं सांभरिया में 60 प्रतिशत से अधिक सैम्पल जांच के दौरान फेल हो गए।

क्या है जल अमृत योजना

विभाग ग्रामीणों को साफ पानी मुहैया करवाने के लिए जल अमृत योजना के तहत गांवों में आरओ प्लांट लगवा रहा है। प्रथम चरण में जयपुर जिले में 12 स्थानों पर ये प्लांट लगवाए गए। विभाग इन प्लांटस के माध्यम से ग्रामीणों को 10 पैसे प्रति लीटर की दर से आरओ का पानी मुहैया करवा रहा है। विभाग ग्रामीणों की सुविधा के लिए 60 रुपए के कार्डस भी बना रहा है जिसमें ग्रामीणों को प्रतिदिन 20 लीटर पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। बस्सी उपखंड में गढ़ ग्राम पंचायत के चपड़िया और फलियावास के रलावता गाँव में ये आरओ प्लांट लगाए गए है।

ये है जिले की स्थिति

प स कुल जल स्रोत उठाए सैम्पल फेल हुए सैम्पल

आमेर 4326 2877 1137

बस्सी 11395 6616 3193

चाकसू 10141 6240 4864

दूदू 10451 5724 4010

गोविन्दगढ़ 7743 4519 1850

जालसू 4488 2426 782

जमवारामगढ़ 8905 4968 2349

झोटवाडा 3880 3150 1449

कोटपूतली 4154 2801 1385

पावटा 3857 2530 961

फागी 7627 5000 3650

सांभरलेक 9013 5066 3312

सांगानेर 9246 5036 3411

शाहपुरा 7762 4173 1427

विराटनगर 5413 3134 1155

कुल 108401 64260 34935

(आंकडे विभागीय वेबसाइट के अनुसार)

आरओ से कुछ हद तक नियंत्रण

अत्यधिक दाेहन के कारण भूजल स्तर नीचे चला गया है। इसी कारण पीने के पानी में इन अवांछित तत्वों की अधिकता हो गई है। घरों में आरओ के माध्यम से पानी में मौजूद इन तत्वों की अवांछित मात्रा को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। - सिद्धार्थसिंह भाटी, सलाहकार भूजल वैज्ञानिक, जयपुर

ये है तय मानक : विभागीय जानकारी के अनुसार जल में फ्लोराइड की अधिकतम मात्रा 1.5 एमजी प्रति लीटर, पीएच 6.5 से 8.5, टीडीएस की दो हजार एमजी प्रति लीटर, अल्केलिनिटी की 600 एमजी प्रति लीटर, नाइट्रेट की 45 एमजी प्रति लीटर तथा क्लोराइड की अधिकतम मात्रा एक हजार एमजी प्रति लीटर तय की गई।

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