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बांसखो में अब भी धड़ल्ले से बिक रही पॉलिथीन, प्रशासन बना मूकदर्शक

3 वर्ष पहले
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सरकार ने भले ही पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी हो, मगर कस्बे में पॉलिथीन का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। पॉलिथीन का इस्तेमाल प्रशासनिक कार्रवाई की पोल भी खोल रहा है। हालात यह है कि छोटी से लेकर बड़ी दुकान पर पॉलिथीन का जमकर उपयोग हो रहा है। इन लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही।

प्रशासन ने क्षेत्र में दो माह पहले एक बार कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली। बावजूद इसके कस्बे में पॉलिथीन का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। प्रशासन कभी कभार अभियान चलाकर इसके खिलाफ कार्रवाई की औपचारिकता पूरी कर लेता है। इसके बाद फिर से खुलेआम पॉलिथीन का इस्तेमाल होने लगता है। कस्बे में दो माह पूर्व बस्सी एसडीएम अशोक कुमार शर्मा व तहसीलदार राजेश मीना ने पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए दुकानों कर कार्यवाही की थी। उसके बाद कार्यवाही के डर से लोगों ने कागज की थैलियां, जूट तथा कपड़े के थैले का उपयोग करना शुरू कर दिया था। अभी भी कुछ दुकानदार इसका उपयोग कर रहे हैं लेकिन अधिकांश पॉलिथीन में ही सामान की बिक्री कर रहे हैं। इसमें सर्वाधिक बिक्री सब्जी मंडी में हो रही है। इसके अलावा अन्य दुकानदार भी पॉलिथीन में ही सामान दे रहे हैं।

यह है नियम

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत 40 माइक्रोन से पतले पॉलिथीन बैग पर प्रतिबंध है। थोक विक्रेता, दुकानदार, ग्राहक कोई भी इस श्रेणी के पॉलिथीन का उपयोग नहीं कर सकता। यही नहीं पर्यावरण संरक्षण कानून का उल्लंघन करते पाए जाने पर पर्यावरण अधिनियम 1986 के तहत पांच साल की सजा और एक लाख का जुर्माना या फिर दोनों सजा एक साथ हो सकती है।

पंचायत की जिम्मेदारी

ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत की जिम्मेदारी होती है। पालिथीन की रोकथाम के लिए पंचायत को पाबंद कर रखा है। पंचायत बताएंगी तो कार्यवाही की जाएगी। राजेश मीना, तहसीलदार, बस्सी

पालिथीन रोकथाम के लिए समय-समय पर कार्यवाही की जाती है। अब भी कोई व्यापारी पालिथीन का उपयोग करता है तो उस पर कार्यवाही जरूर की जाएगी। रणजीत आलोरिया, पंचायत सचिव, बांसखो

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