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20 हजार जवानों की सुरक्षा में पीएम मोदी आज चौथी बार बस्तर मेें...

3 वर्ष पहले
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20 हजार जवानों की सुरक्षा में पीएम मोदी आज चौथी बार बस्तर मेें...

से कार्यक्रम स्थल तक जाएंगे। वे यहां करीब 3 घंटे रहेंगे। लांच करने के साथ अन्य कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगे। इसके बाद वे जगदलपुर में दोपहर का भोजन करेंगे। वहां से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। प्रधानमंत्री के मुख्य आतिथ्य में जांगला में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह करेंगे। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय, स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल, मंत्री, सांसद दिनेश कश्यप भी उपस्थित रहेंगे।

32 साल बाद फिर बस्तर में विमान सेवा...

से वायुदूत की सेवा शुरू की गई थी, जिसमें 8 सीटर प्लेन चलाया जाता था, लेकिन जगदलपुर से रायपुर तक के लिए यात्रियों की संख्या ज्यादा नहीं होने और एयरपोर्ट को डीआरडीओ को हस्तांतरित करने के कारण यह सेवा बंद कर दी गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा-विधायक को हिरासत में न लें, गिरफ्तार करें

कहते हुए गिरफ्तारी से इनकार कर दिया। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ऐसे मामलों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। इसके अलावा सीबीआई टीम शुक्रवार को उन्नाव उस होटल में पहुंची, जहां पीड़ित परिवार को रखा गया है। यहां परिवार की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। खाना में किसी तरह की कोई मिलावट न हो पाए, इसके लिए उन्हें अच्छी तरह जांच कर खाना दिया जा रहा है। कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ धारा 363, 366, 376, 506 और पॉस्को एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

जोगी के लिए काम कर रहे कौशिक और राय कांग्रेस से बर्खास्त

पार्टी से बाहर निकालने खुलेआम पीसीसी चीफ भूपेश बघेल को चुनौती भी दे रहे थे। पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के व्हिप का उल्लंघन करते हुए कौशिक और राय ने मतदान का बहिष्कार किया था। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव काफी नाराज हुए थे। उन्होंने दोनों नेताओं पर कार्रवाई के लिए पीसीसी को पत्र भी लिखा था। इसके बाद ही दोनों नेताओं को पीसीसी की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

हताशा भरी कार्रवाई, कार्रवाई का महत्व नहीं : कांग्रेस से बर्खास्तगी पर विधायक आरके राय ने कहा है कि अभी मुझे फैसले की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर इस तरह को कोई फैसला आया है, तो यह कांग्रेस की हताशा भरी कार्रवाई है। हम तो पिछले दो साल से जोगी के साथ हैं। हमने इसकी घोषणा भी की थी, उस समय ये लोग कहां थे। अब इस कार्रवाई का कोई महत्व नहीं है।

हाईकोर्ट से संसदीय सचिवों के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज

रिकॉर्ड या दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। वहीं, अगस्त 2017 में दिए गए आदेश को यथावत रखा गया है, इस आदेश के मुताबिक संसदीय सचिव मंत्री के तौर पर कार्य नहीं कर सकेंगे। संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते कांग्रेस के मो. अकबर ने दो याचिकाएं और रायपुर के राकेश चौबे ने जनहित याचिका लगाई थी। 1अगस्त 2017 को हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के मंत्री के तौर पर कार्य करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सभी सुविधाएं देने का आरोप लगाते हुए राकेश चौबे ने अवमानना याचिका लगाई थी। सभी पर एक साथ सुनवाई हो रही है। 16 मार्च को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की बेंच ने सभी याचिकाएं खारिज कर दी। राज्य शासन की तरफ से महाधिवक्ता जेके गिल्डा और शासकीय अधिवक्ता प्रसून भादुरी ने पैरवी की।

याचिकाओं में दिए थे यह तर्क : याचिकाओं में कहा गया था कि अधिसूचना जारी कर संसदीय सचिवों की नियुक्ति करना और उन्हें कैबिनेट मंत्री के साथ संबद्ध करना पूरी तरह असंवैधानिक है। संसदीय सचिव का पद सृजित करने का अधिकार राज्य सरकार या राज्यपाल को नहीं है, ऐसा कर राज्य सरकार ने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।

सरकार व संसदीय सचिवों ने जवाब में ये कहा : सरकार और संसदीय सचिवों की तरफ से प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि संसदीय सचिव पद की अवधारणा लोकतंत्र के स्वीकृत मानदंडों के मुताबिक बेहतर तरीके से प्रशासन और प्रबंधन है। लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार में मंत्री बनाए गए विधायकों के साथ संसदीय सचिवों को संबद्ध करने का उद्देश्य बेहतर प्रशासन और प्रबंधन है। संसदीय सचिव संबद्ध रहने से मंत्री जनता के प्रति अपने सामूहिक जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकेंगे।

साबित नहीं कर सके संसदीय सचिवों के पास लाभ का पद

छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम 1972 के तहत मंत्रियों को वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। याचिकाओं में इस अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती ही नहीं दी गई थी। बावजूद इसके हाईकोर्ट ने अधिनियम के तहत किए गए भुगतानों पर विचार किया।

ये हैं संसदीय सचिव : वर्तमान में अंबेश जांगड़े, लाभचंद बाफना, लखन देवांगन, मोतीराम चन्द्रवंशी, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा, सुनीति सत्यानंद राठिया, तोखन साहू, चंपा देवी पावले, गोवर्धन सिंह मांझी और राजू सिंह क्षत्री को संसदीय सचिव हैं।

हमारी उम्मीदों के अनुरूप ही फैसला आया है ...

अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा था कि संसदीय सचिवों को मंत्रियों वाले कोई अधिकार अथवा सुविधाएं नहीं मिलेगी। भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट के फैसले पर कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कि दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है।उन्होंने कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति छोड़ सकारात्मक राजनीति करने की नसीहत भी दी है।

याचिका खारिज नहीं हुई- कांग्रेस

कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने इस मामले भाजपा नेताओं की समझ पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह और बीजेपी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को न्यायालयीन मामलों की समझ नहीं है, इसलिए संसदीय सचिवों के मामले में हुए फैसले को वे समझ बैठे कि याचिकाएं खारिज हो गई हैं जबकि याचिकाएं खारिज न होकर निराकृत हुई हैं।

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