लघु धान्य फसलों के लिए कृषि कॉलेज सर्वश्रेष्ठ केंद्र घोषित
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, जगदलपुर को लघु धान्य फसलों पर अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (लघु धान्य) के तहत देश भर में संचालित 16 मुख्य केंद्रों एवं 20 स्वैच्छिक केंद्रों में सर्वश्रेष्ठ केंद्र के रूप में गुरुवार को सम्मानित किया गया।
कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागार में लघु धान्य फसलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 29वीं दो दिवसीय वार्षिक समूह बैठक के समापन पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (खाद्य एवं वन्य फसलें) डाॅ आईएस सोलंकी ने शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र जगदलपुर में लघु धान्य परियोजना के प्रभारी डाॅ. अश्वनी ठाकुर एवं उनके सहयोगियों को सम्मानित किया।
रागी का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 35, कोदो 32 और कुटकी का 15 क्विंटल हो रहा: 5 घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में उन्होंने पाया कि शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में इस समय रागी का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 35 क्विंटल, कोदो 32 और कुटकी का 15 क्विंटल हो रहा है जबकि अन्य केंद्रों में 10 से 20 क्विंटल तक ही सिमटकर रह गया है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एससी यादव ने बताया कि इसके अलावा कृषि महाविद्यलाय जगदलपुर द्वारा इंदिरा रागी-1, छग रागी 2, इंदिरा कोदो-1 व इंदिरा कोदो -2 के साथ ही छग कुटकी 1 और छग कुटकी 2 काे विकसित किया गया है जिसकी खेती बस्तर के किसान इस समय बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। वैज्ञानिक ने कहा कि इसके अलावा आनुवांशिक पादप रोग, तथ्य विज्ञान और प्रयोगात्मक अध्ययन को लेकर भी काफी मेहनत की गई थी। इसका फायदा इस बैठक में हुआ।
उपलब्धि
35 कृषि कॉलेजों को पीछे छोड़ शहीद गुंडाधूर अनुसंधान केंद्र ने मारी बाजी, कोदो, कुटकी, रागी के उत्पादन को बढ़ावा
जगदलपुर। प्रशस्ति पत्र लेते शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यलय के वैज्ञानिक
रागी की दो हजार से अधिक किस्मों का संग्रहण
बैठक के दौरान लघु धान्य फसलों का उत्पादन एवं प्रसंस्करण करने वाले दो कृषक समूहों को भी सम्मानित किया गया। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता एससी मुखर्जी ने बताया कि नेशनल ब्यूरो आॅफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के सहयोग से यहां रागी की दो हजार से अधिक किस्मों का संग्रहण एवं दस्तावेजीकरण किया गया है। इस केन्द्र द्वारा लघु धान्य फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन करते हुए कोदो राइस, कुटकी राइस, रागी माल्ट, मल्टीग्रेन आटा आदि उत्पादों का निर्माण एवं विक्रय किया जा रहा है। इन फसलों से नए उत्पाद तैयार करने अनुसंधान भी जारी है।