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टीन-टप्पर के नीचे चल रहा िचंतागुफा थाना इस थाना क्षेत्र में शहीद हो चुके हैं 150 जवान

3 वर्ष पहले
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मो. इमरान नेवी| जगदलपुर/दोरनापाल

सुकमा जिले का चिंतागुफा इलाका,यह पूरा इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। इस इलाके में अकेला पुलिस वाला घूम नहीं सकता, किस पेड़ किस सड़क किस पगडंडी में बम गड़ा है या नक्सली खड़े हैं किसी को नहीं पता। सुरक्षा बलों के जवानों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी अब आम हो गई है।

इलाके की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर थाना और कैंप संचालित है उस स्थान की फोटोग्राफी तक जवान नहीं करने देते । इस इलाके में विकास और नक्सलियों के खात्मे के लिए पिछले 8 सालों में डेढ़ सौ जवानों ने अपनी शहादत दी है। एक दशक में इतनी शहादत देश के किसी भी थाने में तैनात जवानों ने नहीं दी है। चिंतागुफा थाना ने इतनी शहादतें दी लेकिन अभी तक यहां पक्का थाना भवन ही नहीं बन पाया है। यहां टीन टप्पर से जोड़कर सीआरपीएफ कैंप और थाना एक साथ चलाया जा रहा है।

यहां पक्के भवन के अभाव में जवानों को हर मौसम में तकलीफ झेलनी पड़ती है। बारिश में पानी और जहरीले जंतुओं का खतरा तो गर्मी में लू का वहीं ठंड में शीतलहर झेलकर जवान यहां दिन-रात काट रहे हैं।

यहां शहीद हुए जवानों की याद में स्मारक भी बनाया गया है, जिसमें शहीद जवानों के नाम लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जिन जवानों ने यहां विकास और सुरक्षा देने की चाह में अपनी जान दी है उन्हें लोग याद रखें। थाना परिसर के पास ही इस स्मारक का निर्माण करवाया गया है।

शहीद जवानों की याद में स्मारक भी बनाया गया है

झोपड़ी नहीं दिख रही... तस्वीर नहीं ले सकते

जगदलपुर. थाने के सामने से फोटो खींचने की अनुमति नहीं, इसलिए किनारे से बोर्ड की तस्वीर ही ली गई।

ताड़मेटला की घटना यहीं हुई थी

ताड़मेटला में नक्सलियों ने एक साथ सीआरपीएफ के 76 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। बस्तर और पूरे देश में यह सबसे बड़ी घटना थी। ताड़मेटला भी चिंतागुफा थाना क्षेत्र का ही हिस्सा है। पहले यह इलाका दंतेवाड़ा जिले में आता था लेकिन नए जिले के तौर पर सुकमा का उदय होने के बाद अब चिंतागुफा सुकमा जिले का हिस्सा है और यहां नक्सली दबाव को देखते हुए इसे थाना घोषित किया गया है।

39 नक्सली भी मारे गए : इस पूरे इलाके में जहां 150 जवानों ने सड़क और लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी शहादत दी। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ों में अब तक 39 नक्सली भी मारे गए हैं। हालांकि मारे गए नक्सलियों की संख्या और भी ज्यादा है लेकिन मौके से 39 नक्सलियों के शव ही बरामद किए गए हैं।

किस साल कितने जवान शहीद हुए

चिंतागुफा थाने में अब तक जवानों ने सड़क निर्माण को सुरक्षा देने और एरिया डोमिनेशन के दौरान ही शहादतें दी। एक नजर में देखें कब कितने जवान शहीद हुए।

पेदीगुड़ा 2009 10 जवान शहीद

सिंघनमड़गु 18 सितम्बर 2009 6 जवान शहीद

ताड़मेटला 6 अप्रैल 2010 76 जवान शहीद

चिंतागुफा 22 मार्च 2012 1 जवान शहीद

चिंतागुफा 4 अप्रैल 2012 1 जवान शहीद

चिंतागुफा 9 अप्रैल 2014 3 जवान शहीद

कसालपाड 1 दिसम्बर 2015 14 जवान शहीद

पिडमेल 9 अप्रैल 2015 7 जवान शहीद

चिंतागुफा 20 अगस्त 2016 1 जवान शहीद

चिंतागुफा 16 सितंबर 2016 1 जवान शहीद

चिंतागुफा 22 नवम्बर 2016 को 1 जवान शाहिद

बुर्कापाल 24 अप्रैल 2017 25 जवान शहीद

तुण्डामरका में 24 जून को 3 जवान शहीद

चिंतागुफा 19 नवम्बर को 1 जवान शहीद

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