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बाल विवाह में शामिल हुए तो खाएंगे जेल की हवा, एक लाख जुर्माना भी देना होगा
अक्षय तृतीया पर जिले में कुछ जगहों पर बाल विवाह का आयोजन किया जाता है। शुभ नक्षत्र में होने वाले ऐसे विवाह को रोकने के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर महिला बाल विकास विभाग, महिला और बाल संरक्षण विभाग के अधिकारियों की एक टीम गठित की गई है। बाल विवाह रोकने एवं जागरुकता बढ़ाने कार्यक्रम व पोस्टर बेनर के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। इसके बाद भी यदि बाल विवाह कराने वालों में माता-पिता, भाई-बहन, बाराती, टेंट हाउस, प्रिंटर्स, ब्यूटी पार्लर, हलवाई, मेरिज गार्डन, घोड़ी वाले, बैंड-बाजा वाले, कैटरर्स, पंडित, समाज के मुखिया सहित अन्य लोग शामिल होंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में एक साल की कैद और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
बाल विवाह से बेटियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है विपरीत असर : जिला बाल संरक्षण अधिकारी विजय शर्मा ने कहा कि कम उम्र में विवाह न केवल बीमारियों को निमंत्रण देता है बल्कि इससे बेटियों के जीवन पर कुप्रभाव भी पड़ता है। कम उम्र में निर्णय लेने की क्षमता का विकास नहीं हो पाता। इससे घरेलू झगड़े, मारपीट, पारिवारिक कलह और यौन उत्पीड़न आदि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसके अलावा कम उम्र में प्रसव के दौरान माता की मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। जन्म के समय शिशु के मृत अथवा कुपोषित पैदा होने की संभावना बनी रहती है।
सरपंच और कोटवारों को बाल विवाह रोकने कहा गया है
जिले में यह नौबत न आए इसलिए सरपंच, कोटवारों को इस प्रकार के विवाह को रोकने के लिए कहा गया है। जिला महिला बाल संरक्षण अधिकारी वीनू हिरवानी ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी करना कानूनी अपराध है। प्रदेश में बाल विवाह रोकने अभियान चलाया जा रहा है जिसमें काफी सफलता मिली है।
दो साल में बाल विवाह के पांच मामले मिले
बस्तर में बाल विवाह को रोकने के उपाय लगातार किए जा रहे हैं। बावजूद इसके वर्ष 2016-17 और 2017-18 में पांच मामले सामने आए। इसमें से चार मामले केवल बस्तर ब्लाक में ही पाए गए थे। इन चारों मामले में लड़कियों की उम्र 16-17 साल के बीच थी। पांच में से चार शादियों की तैयारी चल रही थी वहीं एक शादी के लिए तो लड़की लड़के के घर जा चुकी थी। चोरी छिपे होने वाली इन शादियों की जानकारी देने के लिए दो ग्रामीणों ने मोबाइल फोन का उपयोग किया वहीं तीन शादियों की जानकारी ग्रामीणों ने खुद मौके पर जाकर अधिकारियों को दी।