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पहली बार कवर्धा नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार ने कवर्धा को नक्सल प्रभावित जिला घोषित किया है। केंद्रीय गृह विभाग ने दो दिन पहले माओवाद प्रभावित जिलों को नए सिरे से चिन्हित किया है। माओवाद प्रभावित जिलों की सूची से 44 जिलों का नाम हटा दिया गया है। अब देश के सिर्फ 30 जिले ही माओवाद से प्रभावित हैं।

इसमें छत्तीसगढ़ के सरगुजा (अंबिकापुर), कोरिया और जशपुर जिले को नक्सल सूची से बाहर करते हुए कवर्धा जिले को शामिल किया है। क्योंकि, 2016 से मप्र के बालाधाट, मंडला के सरहद से लगे कवर्धा में नक्सल मूवमेंट में तेजी आई है। अपने विस्तार प्लान के तहत इस इलाके में नक्सलियों ने बटालियन तक तैनात कर रखी है।

अब राज्य में 14 जिले नक्सल प्रभािवत

नई सूची में कवर्धा का नाम जुड़ने और तीन जिलों का नाम हटने से राज्य में अब माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या 14 हो गई है। इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, बालोद, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कवर्धा और बलरामपुर जिले शामिल हैं। इन जिलों की सुरक्षा में करीब 60 हजार से अधिक जवान तैनात हैं। इसमें 40 हजार जवान केंद्रीय बलों के हैं। नक्सल प्रभावित सूची से बाहर हुए सरगुजा, कोरिया और जशपुर में पिछले 5 वर्षों से न तो कोई नक्सल मूवमेंट हुई न ही कोई घटना हुई, इसलिए सूची से इनका नाम हटाया गया।

केंद्र सरकार के इस फैसले के बारे में...

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

अमरकंटक तक कब्जा करना चाहते हैं नक्सली

बस्तर क्षेत्र में फोर्स से अपने कैडर को हो रहे नुकसान के कारण नक्सली विस्तार में जुटे हैं। वे मध्यप्रदेश के सतपुड़ा रेंज कहे जाने वाले मैकाल की पहाड़ियों से लगे इलाकों को अपने लिए महफूज ठिकाना बना रहे हैं। इन पहाड़ियों की इस ओर कवर्धा और इस ओर मप्र के बालाघाट, मंडला जिले की सरहद आती है। इस क्षेत्र में नक्सली आमदरफ्त बढ़ाते हुए बीते दो वर्ष में छोटी-बड़ी वारदात भी कर चुके हैं। कवर्धा के बकरकट्टा से लेकर रेंगाखार तक उनकी आवाजाही के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2016 में कवर्धा के भावे में पुलिस ने बड़े एनकाउंटर को भी अंजाम दिया था। उसमें मिले नक्सली साहित्य के हवाले से पुलिस सूत्रों का कहना है कि माओवादी बालाघाट से अमरकंटक तक के इलाकेे को कब्जे में लेना चाहते हैं।

केंद्र की सूची से सरगुजा जशपुर व कोरिया बाहर

राजनीतिक रुप से यह होगा असर

कवर्धा को नक्सल प्रभावित जिले में शामल किए जाने के की राजनीतिक मायने भी होंगे। इस साल के चुनावी कार्यक्रम में कवर्धा को बस्तर के साथ पहले चरण के मतदान वाले जिलों में रखा जाना तय है। यहां के मतदान पर सीधे केंद्रीय फोर्स की नजर रहेगी। इस जिले में कवर्धा और पंडरिया दो विधान सभा क्षेत्र आते हैं। इस समय दोनों ही सीटों पर भाजपा का कब्जा है। वर्ष 2013 के चुनाव में राजनांदगांव को बस्तर के साथ पहले चरण में रखा गया था।

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