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टाईअप वाली सीटी स्कैन मशीन खराब होने से नहीं मिला सही इलाज, बच्चे ने दम तोड़ा

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती 4 साल के बच्चे यूकेश ने अंतत: सही इलाज के अभाव में सोमवार की सुबह तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। यह बच्चा पिछले गुरूवार से हास्पिटल में भर्ती था। उसका पेट अचानक ही फूल गया था और उसे मेकॉज में गंभीर अवस्था में लाकर भर्ती किया गया था। उसकी बीमारी जानने के लिए डॉक्टरों ने उसके पेट का सीटी स्कैन करने की बात कही। सीटी स्कैन जांच के लिए इस बच्चे के पिता के पास पैसे नहीं थे, न ही उनके पास गरीबी रेखा या स्मार्ट कार्ड है। इसके अभाव में 5 दिनों तक वह वार्ड में ही पड़ा रहा।

पता ही नहीं लगा सके कि क्या बीमारी थी यूकेश को: डॉक्टरों को अंत तक यही पता नहीं चल पाया कि आखिर बच्चा कौन सी बीमारी की चपेट में है। किरंदुल इलाके से गुरूवार को पेट फूलने, पेशाब नहीं होने की शिकायत के बाद 4 वर्षीय यूकेश को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया था। यहां आते ही पहले कैथेटर लगाया गया। इससे कुछ यूरीन बाहर तो आई लेकिन पेट की सूजन कम नहीं हुई । डॉक्टरों को आगे के इलाज या रायपुर रेफर करने के लिए बीमारी का कारण जानना जरूरी था लेकिन 5 दिनों में बच्चे का सीटी स्कैन ही नहीं हो पाया।

भास्कर ने चार दिन पहले हास्पिटल अधीक्षक को दी थी यूकेश की जानकारी, उन्होंने कहा था- क्या कर सकता हूं

यूकेश के सीटी स्कैन के लिए वार्ड में तैनात स्टाफ के अलावा भास्कर ने भी हास्पिटल अधीक्षक तक जानकारी पहुंचाई थी। चार दिनों पहले डॉ. अविनाश मेश्राम ने दो टूक कह दिया था टाइअप वाली सीटी स्कैन मशीन खराब है, वो कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाएंगे। इसके बाद दो दिनों से इस संबंध में लगातार समाचार भी प्रकाशन किया गया।

लीवर डैमेज था पर कितना ये नहीं पता चल पाया

यूकेश का पेट फूल गया था, इसके पीछे की वजह लीवर का खराब होना बताया गया। लीवर में सूजन की वजह से पेट फूल गया जिसकी वजह से मूत्राशय में परेशानी शुरू हुई और यूकेश की यूरीन बंद हो गई जिससे उसकी तकलीफ और बढ़ गई। मेकॉज के डॉक्टरों ने उसे लीवर कैंसर से पीड़ित होने की आशंका जताई थी। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि उसका 80 प्रतिशत लीवर फूल चुका था। ऐसा क्याें हुआ ये सीटी स्कैन से ही पता चलता।

कलेक्टर बोले-व्यवस्था करता हूं

इधर मामले पर चर्चा करते हुए बस्तर कलेक्टर धनंजय देवांगन ने कहा कि सीटी स्कैन मशीन के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती है इसे दिखवाता हूं। उन्होंने कहा कि जल्द ही मरीजों के लिए कुछ व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल पर विचार किया जा रहा है।

संजीवनी से इलाज हो पाता इससे पहले ही दम तोड़ दिया

यूकेश के हास्पिटल में भर्ती होने के दूसरे दिन ही वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों और डाक्टरों को उसकी माली हालात और दस्तावेज नहीं होने की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों ने इसकी जानकारी हास्पिटल अधीक्षक अविनाश मेश्राम तक पहुंचाई और बच्चे के लिए सीटी स्कैन फ्री करवाया। जब तक फ्री परमिशन मिली तब तक अपोलो डीएसआर की सीटी स्कैन मशीन खराब हो चुकी थी। इसके बाद दो दिनों तक जब प्रबंधन की ओर से स्कैन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो वार्ड में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ ने सोमवार सुबह के राउंड के बाद यूकेश का संजीवनी से इलाज करवाने के लिए प्रक्रिया शुरू की और जैसे ही कागज तैयार करने डॉक्टरों की टीम बैठी, वैसे ही यूकेश ने दम तोड़ दिया।

सीधी बात

डॉ. अविनाश मेश्राम, अधीक्षक

यूकेश की मौत हो गई सर।

- कौन यूकेश।

चिल्ड्रन वार्ड में जो भर्ती था जिसका सीटी स्कैन नहीं हो रहा था

- हां हां क्या कर सकते हैं?

शासन को पत्र लिखा है क्या?

- कई बार लिखा है , मौखिक भी बताया है।

कब लिखा था पत्र?

- जमाने से लिख चुके हैं, डायरेक्टर का लेटर अाया है, मशीन के लिए बीडर नहीं मिल रहा है।

अभी जिससे करार है वो सुविधा नहीं दे पा रहा है कार्रवाई कर रहे हैं क्या?

- क्या कार्रवाई? जितने दिन स्कैन नहीं करेगा उतने दिन के पैसे नहीं देंगे।

सीटी स्कैन बंद है, लोग मर रहे हैं, वैकल्पिक व्यवस्था करें।

- इसके लिए मैं कुछ नहीं बोल सकता।

मैं क्या बोलूं, कुछ नहीं बोल सकता

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