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विश्व धरोहर दिवस पर उपेक्षित रहे बस्तर के ऐतिहासिक स्थल, कोई आयोजन भी नहीं हुआ

3 वर्ष पहले
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दंतेवाड़ा| विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल पर भी जिले में ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा का सिलसिला जारी रहा। ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर कोई कार्यक्रम तक आयोजित नहीं हुए। बैलाडीला की पहाड़ियों से लेकर दंतेवाड़ा, बारसूर, छिंदनार, मोफलनार, कटेकल्याण जैसे इलाके में 11वीं से 13वीं शताब्दी के बिखरी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का कोई इंतजाम नहीं है।

केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने केवल दंतेश्वरी मंदिर, भैरम बाबा मंदिर, समलूर के करली महादेव मंदिर, मामा-भांजा मंदिर, गणेश मंदिर जैसे कुछेक स्थलों को संरक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है। समलूर का करली महादेव मंदिर एक तरफ झुकने लगा है। बारसूर के सोलह खंभा, आठ खंभा मंदिर के रीसेटिंग की मांग पर न तो राज्य सरकार का पुरातत्व विभाग ने गंभीरता दिखाई है और न ही केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने स्मारकों को संरक्षित घोषित किया है।

दंतेवाड़ा। समलूर का करली महादेव मंदिर एक तरफ झुकने लगा है।

दो साल में भी चुराई गई मूर्तियों का पता नहीं चला

भैरमबाबा मंदिर से चुराई गई नटराज की दुर्लभ प्रतिमा और तुंडाल भैरम मंदिर से गायब की गई मुख्य प्रतिमा के चोरों के बारे में 2 साल में भी पुलिस कोई सुराग नहीं जुटा सकी है। इसके अलावा दंतेश्वरी सरोवर किनारे स्थित नाग-नागिन युगल की प्रतिमा को गायब हुए करीब डेढ़ साल बीत गए, कुछ पता नहीं चल पाया है।

पुरातत्व संग्रहालय का प्रस्ताव लंबित

बिखरे पड़े पुरातात्विक व ऐतिहासिक महत्व के धरोहरों को संरक्षित करने के लिए जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा में पुरातत्व संग्रहालय निर्माण का प्रस्ताव दशक भर से लंबित है। टेंपल कमेटी की बैठक में भी इसका प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन केंद्र या राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस मामले में पुरातत्व विभाग के अफसर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।

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