नक्सलियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। दक्षिण-पश्चिम बस्तर में हाल के दिनों में सड़क निर्माण कार्य में लगी मशीनों व वाहनों में आगजनी की घटनाओं के अलावा मौके पर काम करने वाले मजदूरों और मुंशियों पर भी कहर ढाने लगे हैं।
लंबी खामोशी के बाद चुनावी साल में आक्रामक रणनीति अपनाकर नक्सलियों ने फिर से दहशत फैलाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके पहले मजदूरों को सिर्फ काम पर दोबारा नहीं आने की चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता था लेकिन बीजापुर जिले में बीते सप्ताह ठेकेदार के मुंशी की हत्या की वारदात को अंजाम देने के अलावा दंतेवाड़ा जिले के भांसी मासापारा में शुक्रवार की सुबह न सिर्फ ठेकेदार की हत्या कर दी, बल्कि मजदूरों को भी जमकर पीटा।
इसके कुछ दिन पहले कुपेर गांव में रेलवे लाइन दोहरीकरण कार्य में लगे मजदूरों, एक रेलवे कर्मचारी और निर्माण कार्य कराने वाले सुपरवाइजर की बेदम पिटाई की थी। साफ्ट टारगेट बन गए मजदूरों और मुंशियों की पिटाई के चलते अब इन इलाकों में निर्माण एजेंसियों में भय व्याप्त है। पीएमजीएसवाय की दशक भर से अधूरी पड़ी सड़कों को पूरा करने की कोशिश कर रहे विभाग को भी तगड़ा झटका लगा है।
जिले में दो दर्जन से ज्यादा अधूरी सड़कों पर री-टेंडर के जरिए फिर से काम शुरू करवाने की कोशिश विभाग कर रहा था, गिट्टी व अन्य मटेरियल डंप कराए गए थे, लेकिन हालिया घटनाओं से घबराए ठेकेदारों ने सड़क डामरीकरण कार्य को लेकर चुप्पी साध ली है। हालांकि नारायणपुर जिले को जोड़ने वाले पल्ली-बारसूर मार्ग, अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग जैसी बड़ी सड़कों के निर्माण का काम सुरक्षा साए में चल रहा है।
मंसूबों पर पानी फेर देंगे: एएसपी गोरखनाथ बघेल ने कहा कि पुलिस के लगातार बढ़ते दबाव के चलते नक्सलियों ने निर्माण काम को निशाना ज़रूर बनाया है, लेकिन उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। इनसे निपटने पुलिस भी रणनीति के तहत काम कर रही है।
पुलिस का दावा- नक्सली फिर से दबाव बना रहे
इधर, इन वारदातों को लेकर पुलिस का दावा है कि फोर्स के बढ़ते दबाव से उबरने के लिए नक्सली ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, ताकि क्षेत्र में दोबारा वर्चस्व कायम किया जा सके। डीआरजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान व बढ़ते तालमेल के चलते लगातार ऑपरेशन चल रहे हैं, जिसका फायदा फोर्स को मिला है। लगातार सरेंडर व गिरफ्तारियों से नक्सलियों का निचला नेटवर्क कमजोर हुआ है और लोग दहशत से उबरते दिख रहे हैं।
मंजूरी के बाद भी शुरू नहीं हो सके काम
दंतेवाड़ा-सुकमा मार्ग और दंतेवाड़ा-फरसपाल-पांडेमुर्गा सड़क चौड़ीकरण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। इन सड़कों को बजट में मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद ठेकेदार बगैर सुरक्षा के काम करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। रेलवे लाइन दोहरीकरण का काम भी ठप पड़ा है।