बारिश से पहले नक्सलियों के खिलाफ सुकमा...
लेकिन खुद करोड़ों रुपए ऐंठ रहे हैं। इनकी विदेशों में करोड़ों की सम्पति है। इनके बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर रहे है। हम इस पर नजर बनाए रखे हैं, आगे ये नहीं चल पायेगा। नक्सलियों के फंड रेसिंग के सारे रास्ते बंद किये जायेंगे। सारी पड़ताल पूरी होने के बाद इनकी सम्पति भी जब्त की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा सुरक्षा बलों के बढ़े दबाव के चलते ही हम बस्तर में 1600 किमी सड़क बनाने में कामयाब रहे हैं।
महंगे पेट्रोल-डीजल से राहत देने के उपायों पर विचार कर रही है सरकार
वर्ष 2018-19 के लिए औसत कीमत 83.9 डॉलर प्रति बैरल होगी जबकि 2017-18 में यह 73.6 डॉलर थी। यदि इस वर्ष जून में कीमत 90 डॉलर के पार गई तो मार्च 2019 तक यह 100 डॉलर पर पहुंच सकती है। तब 2018-19 में औसत कीमत 93 डॉलर होगी। इससे जीडीपी में 0.31% की कमी आएगी, महंगाई 0.58% और राजकोषीय घाटा 0.4% बढ़ जाएगा। इंडस्ट्री ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटाने की मांग की है। फिक्की और एसोचैम ने कहा कि महंगे क्रूड से रुपया कमजोर होगा और इससे आयात बिल बढ़ेगा। मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ने से निजी निवेश कम होगा। इसलिए सरकार को पेट्रोल-डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटानी चाहिए। केंद्र को राज्यों के साथ पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाने पर चर्चा करनी चाहिए।
दवा बनाए छोटी कंपनी, बड़ी कंपनी मुनाफा ले 1000 फीसदी, अब नहीं चलेगा
एक्ट में बदलाव के बाद दवा की क्वालिटी खराब होने अथवा नकली दवा होने पर दवा बनाने वाली कंपनी के साथ-साथ मार्केटिंग करने वाली कंपनी को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अभी तक ड्रग्स कॉस्मेटिक एक्ट के तहत सिर्फ दवा बनाने वाली कंपनियों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता था और खराब दवा पर इन्हीं कंपनियों पर मुकदमा चलता था और सजा भी इन्हें ही मिलती थी। बड़ी-बड़ी कंपनियां यह कह कर बच जाती थी कि दवा किसी और कंपनी ने तैयार की है, इस दवा पर तो बस उनकी कंपनी का नाम है, इसलिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।
फैसले से दवा की क्वालिटी अच्छी होगी, मरीजों को मिलेगा फायदा : पेशेंट सेफ्टी एंड एक्सेस के संस्थापक बिजोन मिश्रा ने बताया कि देश में ढाई लाख करोड़ रुपए का दवा कारोबार है। देश में बनने वाली 60 फीसदी से ज्यादा दवाइयां ऐसी हैं, जो छोटी-छोटी कंपनियां बनातीं हैं। इन दवाओं को बड़ी कंपनियां अपना नाम लिख कर बेचती हैं। देश में तैयार होने वाली कुल दवाओं में से 10 फीसदी से ज्यादा दवा तैयार करने वाली एकुम ड्रग्स एंड फॉर्मास्यूटिकल लिमिटेड के संस्थापक डीसी जैन ने बताया कि वे देश में बड़ी-बड़ी दवा कंपनियों के लिए दवा तैयार करते हैं। बड़ी कंपनियां दवा का सही तरीके से भंडारण नहीं करती, जिसकी वजह से कई बार दवा खराब हो जाती है और इसकी सजा दवा तैयार करने वाली छोटी कंपनियों को भुगतना पड़ती है। बड़ी कंपनियां मुनाफा ज्यादा कमाती हैं और जिम्मेदारी कुछ भी नहीं लेती। सीडीएससीओ के इस निर्णय से दवा की क्वालिटी और अच्छी होगी और इसका लाभ आम मरीजों को मिलेगा।
जर्मनी में बच्चों को घुमाने ले जा रहे 10 परिवारों पर 80-80 हजार रु. जुर्माना; वजह- स्कूल टाइम में बच्चों को कहीं ले जाना अपराध है
पुलिस ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों की आधिकारिक छुट्टियां शुरू होने से पहले छु्ट्टी पर नहीं ले जा सकते। लेकिन अगर मां-बाप को किसी कारण छुट्टी चाहिए, तो वे स्कूल से इसकी अनुमति लें। इस अनुमति पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार स्कूल हेडमास्टर का होगा।
भ्रष्टाचार उजागर करने वाले युवक को ग्राम पंचायत ने डिफाल्टर घोषित कर दिया; तर्क में कहा- इससे खराब हो रही है हमारी छवि
कि वह गांव में हो रहे सरकारी कामकाज में गड़बड़ी की शिकायत जिला प्रशासन से करता था। युवक ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत की, जो जांच में सही पाई गई। उसने मूलभूत की राशि के खर्च में गड़बड़़ी व पशु शेड निर्माण की भी शिकायत की। पंचायत के प्रतिनिधियों को इन शिकायतों से लगा कि इससे उनकी छवि को नुकसान हो रहा है, इसलिए युवक के खिलाफ ही नियम विरूद्ध प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
रिकॉल: जब सरपंच ने अपने भतीजे को दे दिया था अपना पॉवर
इसी तरह कबीरधाम जिले के लोहारा जनपद के अंतर्गत गांगीबहरा पंचायत में भी अजीब मामला सामने आया था। तब पंचायत की महिला सरपंच ने स्टाम्प पेपर के जरिए अपने सरपंच होने के सारे अधिकार नियम विरूद्ध अपने भतीजे को सौंप दिए थे। इस मामले में सरपंच को कुछ दिनों तक निलंबित रखा गया था, जिसके बाद बहाल किया गया।
केरल में चमगादड़ से फैलने वाले निपाह वायरस से 11 लोगों की मौत
और श्रम मंत्री ने कोझिकोड में डेरा डाल रखा है। दो कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के डायरेक्टर के नेतृत्व में डॉक्टरों की हाई लेवल टीम भी केरल भेजी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केरल के स्वास्थ्य विभाग से लगातार संपर्क बनाए हुए है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने ब्लड सैंपल की जांच के बाद पुष्टि की है कि बुखार के कारण हुई चार में से तीन मौतों की वजह निपाह वायरस था। पहली मौत 19 मई को हुई थी।
कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, इलाज करने वाली नर्स की भी जान गई:निपाह वायरस के कारण कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वायरस की चपेट में आए परिवार के मुखिया का भी इलाज चल रहा है। इन लाेगों का उपचार करने वाली लिनी नाम की नर्स की भी तेज बुखार के बाद मौत हो गई। इस बीमारी की वजह से अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, स्वास्थ्य सचिव राजीव सदानंदन ने अभी तीन मौतें ही निपाह वायरस (एनआईपी) से होने की पुष्टि की है।
लक्षण: सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहाेशी इस बीमारी के लक्षण हैं। डाक्टरों के अनुसार यह वायरस बहुत तेजी से असर करता है। मरीज को तुरंत इलाज न मिले तो 48 घंटे के अंदर वह कोमा में जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वायरस का अभी तक कोई वैक्सीन भी विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।