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पीएम तो गए, अब जांगला से फोर्स-अफसरों को निकालने की मशक्कत

3 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा और आयुष्मान योजना के सफल और सुरक्षित शुरुआत के लिए पूरे प्रदेश से अफसरों और सुरक्षा बलों के जवानों को लगाया था। यहां पिछले तीन दिनों से तीस हजार से ज्यादा प्रशासनिक अफसर और सुरक्षाबल के जवान 24 घंटे की ड्यूटी पर लगे हुए थे।

पीएम मोदी ने जैसे ही दिल्ली के लिए उड़ान भरी तो अफसरों और जवानों काे भी सुरक्षित वापस लौटाने का सिलसिला शुरू करवाया गया है। मोदी की सभा के तुरंत बाद ही बस्तर के बाहर से आए अफसरों को रिलीफ कर दिया गया। पहले चरण में उन जवानों और अफसरों को रिलीव किया गया जो अपनी गाड़ियों से यहां पहुंचे थे। इसके बाद एक-एक कर जवानों और अफसरों को वापस भेजने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की गई। डीआईजी पी सुंदरराज ने बताया कि सभी लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

अब नया अभियान

नक्सली क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिए चुनौती, कार्यक्रम में हिस्सा लेने पूरे प्रदेश से पहुंचे थे करीब 30 हजार अफसर, जवान व कर्मचारी

अभी 48 घंटे तक जंगलों में तैनात रहेंगे जवान

जांगला में सभा स्थल से लेकर अन्य कार्यक्रमों के लिए बड़ी मात्रा में बाहर से सामान आया था। टेंट से लेकर कई अन्य सामान बाहर से आए थे। ऐसे में इनकी सुरक्षित वापसी के लिए अभी भी जंगलों में जवानों को तैनात रखा गया है। जवान मोदी के दौरे के 48 घंटे बाद तक जंगलों में रहेंगे तब जक जांगला से बाहर से आए लोग और सामान लौट जाएगा। सुरक्षित वापसी के बाद ही बीजापुर से अलर्ट खत्म किया जाएगा।

भारी उत्पात के बाद अचानक ठंडे पड़े नक्सली

पीएम मोदी के दौरे के चार दिनों पहले तक भारी उत्पात और सिलसिलेवार बम धमाके करने के बाद पिछले चार दिनों में नक्सलियों ने बीजापुर में किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया। ऐसा माना जा रहा है कि उत्पात के बीच आईजी विवेकानंद सिन्हा और डीआईजी सुंदरराज पी ने अपनी पूरी ताकत बीजापुर में झोंक दी। सिलसिले वार बम धमाकों के बाद पुलिस ने इसे प्रेस्टीज इशू के तौर पर लिया था।

मोदी से मन की बात, कहा- इंटरनेशनल कंपनियों के प्रोजेक्ट मिल जाएं तो बेहतर

दंतेवाड़ा | पिछड़े इलाके के युवाओं को पहचान दिलाने के लिए दंतेवाड़ा के जावंगा में खुले कॉल सेंटर के युवाओं को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला। जांगला में मोदी युवाओं से मिले, उनसे बातचीत की। फोटो सेशन भी कराया। युवाओं ने पीएम से मन की बात की, कहा कि हमें कुछ नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रोजेक्ट मिल जाएं तो ये बड़ी मदद होगी। पीएम ने उन्हें ओके कहा, और भरोसा दिया कि वे उनकी मदद करेंगे। शनिवार को जो युवा पीएम से मिलने जांगला गए थे, जावंगा के काॅल सेंटर पहुंचते ही इस अनुभव को साझा करते हुए वे खुशी से झूम उठे। युवाओं ने भास्कर से बताया कि हम 28 लोग थे, इनमें 2 स्टाॅल पर थे, जबकि 26 को प्रधानमंत्री से बातचीत करने और फोटो सेशन करवाने का मौका मिला। जब पीएम हमारे बीच आकर बैठे तो ऐसा लगा मानो हम खुली आंखों से सपना देख रहे। इनमें से अधिकांश युवा ऐसे थे जिन्होंने आज तक क्षेत्रीय विधायक को भी नहीं देखा था। सीधे प्रधानमंत्री से मिलना उनके जीवन का सबसे अनमोल मौका था।

मोदी ने पूछा- आपका काम कैसा चल रहा है

पीएम ने काॅल सेंटर का स्टाॅल देखा। पीएम वहां रुके, बस्तर बीपीओ नाम पढ़कर मुस्कुराए। फोटो सेशन के लिए बैठे युवाओं के बीच पीएम और डॉ. रमन सिंह वहीं उनके बीच बैठ गए। मोदी ने उनसे पूछा- आपका काम कैसे चल रहा है, कोई समस्या तो नहीं? युवाओं के बीच से सिद्धार्थ बैरागी ने कहा कि हमें पहला प्रोजेक्ट चेन्नई की एक मल्टीनेशनल कंपनी का मिला है। हम चाहते हैं कि हमें कुछ और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सहयोग मिले। आपकी मदद की जरूरत है। मोदी ने कहा-आेके।

पीएम से मिलने का अनुभव युवाओं की जुबानी

पीएम से मिलने गए युवाओं में बीजापुर के मुगोंडा गांव का प्रदीप 12वीं पास है। पढ़ाई के बाद वह तालाब, डबरी बनाने मजदूरी करने जाता था। प्रदीप ने बताया कि पहले जाॅब और अब पीएम से मुलाकात, मेरी दुनिया ही बदल गई है। भैरमगढ़ के केसकुतुल के रहने वाले पोजोराम ने बताया कि उसके गांव तक पहुंचने न सड़क है, न गांव में बिजली। गांव में फोन नेटवर्क नहीं है, ऐसे में उन्हें नहीं पता है कि मैं पीएम से मिला हूं, वे बहुत खुश होंगे। गंगालूर के मनोज भोगाम के माता-पिता का देहांत तब हुआ जब मनोज 4 साल का था।

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