गेहूं की नाड़ को आग न लगाएं किसान : काहलों
बटाला | खेतीबाड़ी विभाग ने किसानों को अपील की है कि वह गेहूं की कटाई के बाद अपने खेतों में नाड़ को बिलकुल आग न लगाएं। यह अपील करते हुए श्री हरगोबिंदपुर ब्लाक के खेतीबाड़ी विकास अफसर परमबीर सिंह काहलों ने कहा कि आम तौर पर गेहूं की कटाई के बाद किसान बचे हुए नाड़ को आग लगा देते हैं, जिससे वातावरण प्रदूषित होता है, खुराकी तत्व नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी में मौजूद बहुत सारे सूक्ष्मजीव मर जाते हैं। काहलों ने बताया कि गेहूं के नाड़ को आग लगाने के साथ बहुत सारी जहरीली गैंसे , जिनमें कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, मीथेन आदि पैदा होती हैं, जिसके नतीजे के तौर पर मानव को सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी, गले की खराबी, आखों की जलन आदि बीमारियां लग जाती हैं। गेहूं के नाड़ को आग लगाने से 80 प्रतिशत नाइट्रोजन और सल्फर तत्व, 40 प्रतिशत फासफोरस और पोटाश तत्व भी जलकर खत्म हो जाते हैं। नाड़ को आग लगाने से खेतों के किनारे पेड़ भी जल जाते हैं, जिसका बहुत बड़ा नुकसान वातावरण को पहुंचता है।
परमबीर सिंह