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भूतनपुरा के लोग बोले, शुगर मिल ने हवा-पानी में घोला जहर

3 वर्ष पहले
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कीड़ी अफगाना शुगर मिल से निकले शीरे के ब्यास दरिया में कहर बरपाने के बाद अब मिल के आसपास बसे गांववालों ने मिल के कारण होने वाली उन मुसीबतों के बारे में खुलकर बोलना शुरू कर दिया है जो वे बरसों से झेलते आ रहे हैं। इन गांवों में सर्वाधिक प्रभावित गांव भूतनपुरा है।

गांव भूतनपुरा के दर्शन सिंह, परमजीत सिंह, गुरबाज सिंह, गुरनेक सिंह आदि ने बताया कि उनके गांव में करीब 40 घर हैं और पूरा गांव ही इस मिल से दुखी है। गांववालों के अनुसार जब भी मिल चालू होती है, इससे निकलने वाला धुआं इतना जहरीला होता है कि अगर वह आंखों में चला जाए तो कई दिनों तक जलन नहीं जाती है। लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है। धुएं के साथ-साथ गंदा मटीरियल भी हवा में उड़ता रहता है। यह मिल 2008-09 में शुरू हुई थी। उसके बाद से ही उनके गांव में नलकों में गंदा पानी आना शुरू हो गया था। साफ पानी के लिए उन्हें मजबूरन 375 फीट गहरे बोर करवाकर नलके लगवाने पड़े मगर फिर भी पानी थोड़ा-बहुत गंदा आता था लेकिन काम चल जाता था। अब तीन-चार दिनों में यह हालात बन गए हैं कि प्रदूषित होने के कारण वे यह पानी भी पीने में असमर्थ हो चुके हैं। वे लोग गांव के गुरुद्वारे में लगे सबमर्सिबल से पानी ले रहे हैं।

गंदा पानी बाल्टियों में भरकर रोष प्रदर्शन करते लोग। (दाएं) बाल्टी में भरा पड़ा गंदा पानी। -भास्कर

पथरी व सांस की बीमारियों से पीड़ित हुए गांववाले

गांववालों ने बताया कि मिल के आसपास करीब 5-6 किलोमीटर के दायरे में पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। अगर वे पानी स्टोर करके रखते हैं तो 3-4 घंटे में पानी में जाला जमना शुरू हो जाता है। इस गंदे पानी के कारण लोगों को पथरियां हुई हैं और लोग सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

गांव भूतनपुरा के बाशिंदों को काम पर नहीं रखती मिल

गांव भूतनपुरा के लोगों ने बताया कि मिल मालिक उनके गांव का कोई भी व्यक्ति काम पर नहीं रखते हैं। गांव के ही गुरमुख सिंह ने बताया कि उसने कुछ समय इस मिल में काम किया है, वो भी उसे यहां काम इसलिए मिला क्योंकि उसने किसी और गांव का एड्रेस लिखवाया था।

मंगलवार को ओवरफ्लो हुआ था तो कर लिया गया था कंट्रोल, वीरवार को दोबारा ओवरफ्लो होकर हुआ बेकाबू: सुपरवाइजर

शुगर मिल के सुपरवाइजर कुलदीप सिंह ने बताया कि शीरा को जमीन के 35 फीट गहरे बड़े टैंक में स्टोर किया जाता है। वहां से पाइपों के जीरए यह शीरा शराब की फैक्टरी में भेजा जाता है। कीड़ी मिल में शीरा स्टोर करने के लिए दो बड़े-बड़े टैंक बनाए गए हैं। दो दिन पहले सूरज की गर्मी के कारण तापमान बढ़ने से टैंक ओवरफ्लो हुआ था जिसे बड़ी मशक्कत के बाद कंट्रोल कर लिया गया था। वीरवार को शीरा दोबारा ओवरफ्लो हो गया। इसके साथ ही स्टोर हुए शीरे के नीचे की मिट्‌टी भी खिसक गई जिससे शीरा जमीन के नीचे से होते हुए पास से गुजरती नहर में चला गया। यह नहर ब्यास दरिया में मिलती है, जिस कारण यह शीरा नहर के जीरए दरिया में जाकर मिल गया। तापमान बढ़ने से शीरा तेजी से उबाल मारता है और अगर इसे कंट्रोल न किया जाए जो बेकाबू हो जाता है।

17 दिनों से मिल बंद तो फिर कैसा ओवरफ्लो हुआ शीरा

भास्कर के प्रतिनिधियों के पूछने पर मिल अधिकारियों का कहना था कि यह मिल 30 अप्रैल से बंद है लेकिन मिल में बने दो टैंकों में स्टोर शीरा स्टोर सूरज की गर्मी से तापमान बढ़ने के कारण यह ओवरफ्लो हुआ। सवाल यह है कि सूरज के तापमान से शीरा कैसे ओवरफ्लो हो सकता है। मिल अधिकारियों के अनुसार यह शीरा 20 दिन पहले गर्म किया गया था लेकिन 20 दिन के बाद भी यह शीरा ठंडा नहीं हुआ, यह कैसे संभव है। शीरे के ओवरफ्लो के कारण मिल के पीछे जगह पर लगे सफेदे के करीब तीन सौ पेड़ भी बेजान हो चुके हैं। मिल अधिकारी वहां भी सफाई करवाने में जुटे हुए हैं क्योंकि शीरे के कारण यह धरती की निचली स्तर पर जम चुका है।

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