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भाजपा कोर कमेटी के उपप्रधान को बैठक से बाहर निकालने पर भाजपा नेताओं का बायकाॅट, नारेबाजी
भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर
चुनाव-2019 को लेकर मंगलवार को भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं की बैठक कोडू मल्ल सरां में रखी हुई। बैठक में भाजपा पंजाब सचिव उमेश दत्त शारदा विशेष तौर पर पहुंचे। भाजपा नेताओं व वर्करों को संदेश मिला था कि बैठक में जिला कोर ग्रुप, जिला कार्यकारिणी, जिला मोर्चा के सभी पदाधिकारी, जिला के सभी मंडलों के पदाधिकारी, पूर्व व मौजूदा पार्षद, चेयरमैन और वह कार्यकर्ता जिन्होंने कभी कोई चुनाव लड़ा हो जरूर शामिल हों। यह संदेश भाजपा के जिला महामंत्री भूपेश अत्तीर ने जारी किया था। मंगलवार को बैठक के दौरान जब विकास गुप्ता जिला कोर कमेटी के उपप्रधान मौके पर पहुंचे तो वहां बैठे पंजाब सचिव उमेश दत्त शारदा, पूर्व प्रधान राकेश ज्योति, पूर्व प्रधान रमेश शर्मा, जिला प्रधान प्रदीप शर्मा ने उन्हें बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया।
इसके बाद विकास गुप्ता की पूर्व प्रधान रमेश शर्मा से बहस हो गई व सचिव उमेश शारदा ने भी उपप्रधान को बाहर जाने से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस दौरान विकास गुप्ता को बैठक से बाहर निकालने से गुस्साए भाजपा नेता व कार्यकर्ता मनोज कुमार शैंपी, जसबीर कौर पार्षद, राम लाल पार्षद, अंकुश महाजन, कांता महाजन, राजिन्दर, गुलशन कुमार ने भाजपा पंजाब सचिव उमेश दत्त शारदा व जिला प्रधान प्रदीप कुमार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वक्ताओं ने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनावों के समय जिन लोगों ने भाजपा के खिलाफ जाकर कांग्रेस का साथ दिया था, उन्हें बैठक में बिठाया गया है, तो हमें बैठक से बाहर क्यों निकाला जा रहा है। जबकि हम लोगों ने उस समय अकाली-भाजपा के बूथ संभाले थे। उन्होंने कहा कि हम लोग बैठक का बायकाॅट करते हैं।
भाजपा नेता बोले- चुनावों में खिलाफत करने वालों को बैठक में बिठाया तो हमें बाहर क्यों निकाला
बैठक के दौरान बहसबाजी करते भाजपा नेता विकास गुप्ता व राकेश ज्योति। (दाएं) भाजपा पंजाब सचिव उमेश दत्त शारदा के खिलाफ नारेबाजी करते भाजपा नेता।
बैठक में 6 उपप्रधान में से 5 उपप्रधान नहीं हैं तो इन्हें कैसे बुला लेते : शारदा
मामले के बारे में पंजाब सचिव उमेश दत्त शारदा ने कहा कि हम लोग बैठक से पहले कुछ जरूरी सलाह कर रहे थे, जिसके चलते विकास गुप्ता को वहां से चले जाने के लिए कहा था। कोर कमेटी में 6 उपप्रधान होते हैं, जिनमें से 5 बाहर थे, तो विकास गुप्ता को कैसे बुला लेते। मैं भाजपा के कई पदों पर रह चुका हूं और जिन लोगों ने चुनाव में कांग्रेस के हक में प्रचार किया था और भाजपा के खिलाफ रहे हैं, उन्हें उसकी सजा मिल चुकी है।
बायकॉट के बाद बैठक में खाली पड़ी कुर्सियां। -भास्कर
किसी को बैठक से नहीं निकाला, सब गलतफहमी से हुआ
भाजपा के जिला प्रधान प्रदीप शर्मा ने कहा कि भाजपा पार्टी एक परिवार है और उसके कार्यकर्ता व नेता उसके सदस्य हैं। किसी को भी बैठक से बाहर नहीं निकाला गया। यह सब इनकी गलतफहमी के कारण हुआ है।
बटाला-गुरदासपुर को इस बार भी प्रदेश भाजपा कमेटी में जगह नहीं
बटाला में 5 और गुरदासपुर में हैं 2 विधानसभा क्षेत्र
भास्कर संवाददाता | बटाला
भाजपा के पंजाब प्रधान श्वेत मलिक की तरफ से हाल ही में जारी की गई पंजाब प्रदेश बॉडी में भाजपा जिला बटाला-गुरदासपुर से एक भी नेता को शामिल नहीं किया गया। इससे भाजपा के खेमों में किसी भी प्रकार से कोई खुलकर नहीं बोल रहा है। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 में पार्टी को मिली करारी हार के बावजूद किसी को प्रतिनिधित्च नहीं दी गई, ताकि वह आगे पार्टी को मजबूत कर सके। वैसे पूर्व प्रधान विजय सांपला को टेन्योर में भी जिला गुरदासपुर से एक ही को पंजाब बॉडी में लिया गया था, जिसे भी एक विवाद के बाद उतार दिया था। फिलहाल जिस प्रकार माझा के जिला बटाला और गुरदासपुर से किसी को न लिए जाने का सही अर्थ तो यही है कि कोई भी इन पदों के काबिल नहीं है।
जानकारी के अनुसार नवनियुक्त पंजाब भाजपा प्रधान व सांसद श्वेत मलिक ने सोमवार को पंजाब भाजपा बॉडी की घोषणा की, जिसमें वाइस प्रधान से लेकर मीडिया इंचार्ज तक करीब 15 से 20 सदस्य बनाए गए। हैरानी की बात यह है कि पंजाब स्तर की नियुक्तियों में पंजाब प्रधान को जिला गुरदासपुर और जिला बटाला से एक भी चेहरा ऐसा नहीं दिखाई दिया, जिसको पंजाब बॉडी में शामिल किया जा सके या फिर पंजाब स्तर की राजनीति में इन इलाकों के लोग फिट नहीं बैठते। हैरानी वाली बात यह है कि पूर्व प्रधान विजय सांपला की टेन्योर में भी जिला बटाला को छोड़ कर जिला गुरदासपुर से एक को पंजाब में ओहदेदारी दी गई। लेकिन किसी विवाद के बाद उसको भी पद से हटा दिया गया। मतलब कि दो प्रधानों की टेन्योर में भाजपा जिला बटाला और गुरदासपुर से पार्टी को एक भी चेहरा ऐसा नहीं दिखा, जो पंजाब स्तर की बॉडी में काम कर सके। वैसे इस नजरअंदाजगी को भाजपा नेता पार्टी का फैसला बताकर बात को टाल रहे हैं। लेकिन, दो प्रधानों की टेन्योर में एक भी पद न दिए जाने का दबी जुबान में जरूर इन चेहरों पर साफ असर देखा जा सकता है।
2017 के चुनावों के नतीजों से भी नहीं ली सीख
राजनीतिक पंडितों की बात करें तो पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में जिला गुरदासपुर और बटाला से गठबंधन की करारी हार के बावजूद पार्टी ने किसी को पंजाब की बॉडी में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश नहीं की, ताकि इस इलाके को भी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सके और आने वाले लोकसभा चुनावों में एक अच्छे ओहदे का सही ढंग से लोगों में इस्तेमाल किया जा सके।