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ब्यास दरिया में शीरे का जाना हादसा नहीं, पाइपों के जरिए डाल रही शुगर मिल, फैक्टरी सील पर शराब उत्पादन जारी

3 वर्ष पहले
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‘शीरा मिलने से ब्यास दरिया का पानी दूषित होने को एक हादसा बताकर लोगों और प्रशासन का ध्यान भटकाने वाले मिल अधिकारियों ने खुद ही शराब बनाने के लिए स्टोर किए शीरे को ब्यास दरिया में पाइपों के जरिए डाला है। वहीं, हालांकि प्रशासन ने पिछले 20 दिन से बंद पड़ी मिल को सील कर दिया है लेकिन मिल के अंदर शराब की फैक्टरी अभी भी चल रही है।’ यह कहना है ब्यास दरिया का पानी दूषित होने ने लाखों का नुकसान उठाने वाले मछली के ठेकेदार सुशील कुमार का। उन्होंने बताया कि उनके पास सबूत है, उन्होंने वीडियो बनाई हुई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि मिल द्वारा पाइपों के जीरए शीरे को ब्यास दरिया में डाला जा रहा है। उन्होंने भास्कर को यह वीडियो उपलब्ध करवाई है।

ठेकेदार सुशील कुमार ने बताया कि हर साल मई माह में एरिया वाइज बोली होती है, जिसमें मछली पालन विभाग के सभी डायरेक्टर आते हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 17 साल से ठेका ले रहे हैं। उनके पास तलवाड़ा डैम 52 गेट से श्री हरगोबिंदपुर तक का ठेका है, जो उन्होंने 20 लाख रुपए में लिया हुआ है। उन्होंने कुछ महीनों पहले मछली पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को मिल द्वारा ब्यास दरिया का पानी गंदा करने की शिकायत दी थी। अब मिल का शीरा ब्यास दरिया में मिलाने से उनका 50 से 60 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मिल अधिकारियों का यह कहना कि शीरा जहां स्टोर किया गया था, वहां से वह ओवरफ्लो हुआ है, पूरी तरह झूठ है। मिल तो खुद ही पाइपों के जरीए यह शीरा ब्यास दरिया में मिला रही है। मिल पिछले करीब 20-22 दिनों से बंद थी इसलिए शीरे को बाहर फेंकने का मिल ने यही तरीका अपनाकर मछलियों को मारा है। उन्होंने बताया कि डीसी गुरदासपुर द्वारा मिल को तो सील कर दिया गया है, लेकिन अंदर चल रही शराब की फैक्टरी तो पहले की तरह ही चल रही है। प्रशासन ने उसे क्यों नहीं सील किया। मिल को सील करना तो केवल खानापूर्ति है क्योंकि मिल तो पहले से ही बंद थी।

पाइप के जरीए ब्यास दरिया में डाला जा रहा शीरा। (लाल घेर में) यह वीडियो का स्क्रीनशॉट है। -भास्कर

मछलियों की प्रजातियां हुईं खत्म

ठेकेदार सुशील कुमार के अनुसार बाटा (सिल्वर), गौंस, मली, संगाड़ा, सोल, चल्ली, खग्गा आदि कई प्रजातियां शीरे के कारण खत्म हो चुकी हैं।

एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं अफसर

बटाला | चड्ढा शूगर मिल मामले में तीन दिनों बाद भी अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस को अभी तक शिकायत नहीं दी गई, न ही पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज किया है। प्रशासन या पुलिस का कोई अफसर भी फैक्टरी के अंदर जांच करने के लिए नहीं गया। सिर्फ फैक्टरी को बंद करवा दिया गया है लेकिन असल में इस मामले में अभी तक जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अफसरों की तरफ से इस मामले में गेंद एक-दूसरे के पाले में गेंद डाली जा रही है।

मछली पालन विभाग को शिकायत|ठेकेदार ने बताया कि उनके नुकसान और दूषित हुए पानी के संबंध में वह एसडीएम बटाला को शिकायत दी है। वहीं, मछली विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को भी शिकायत कर चुके हैं। डायरेक्टर ने मौका भी देखा है और जांच का आश्वासन दिया है। वह सभी कागजात और वीडियो लेकर एसडीएम बटाला के पास जाएंगे।

डीसी गुरदासपुर : जांच एसडीएम बटाला को दी गई है। यह बात करने का सही समय नहीं है।

एसडीएम बटाला : मुझे जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट बनाकर ऊपर भेजूंगा। जांच अभी शुरू गई है।

डीएफओ : मछलियां मरने की शिकायत पुलिस को दी है। वह इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

श्री हरगोबिदपुर के थानेदार कुलदीप सिंह : हमें कोई शिकायत नहीं मिली है। वाइल्ड लाइफ का कोई अफसर कार्रवाई के लिए नहीं आया।

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