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ग्रामीण डाकिए हड़ताल पर, 8 दिन से नहीं पहुंच रही डाक

3 वर्ष पहले
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मुख्य डाकघर के बाहर धरने पर बैठे जीडीएस के सदस्य। -भास्कर

परेशानी

गुरदासपुर, बटाला व पठानकोट तहसीलों में हैं 500 से अधिक डाकिए

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

14 मई से गुरदासपुर, बटाला और पठानकोट तहसीलों के गांवों में किसी भी तरह का डाकघर से संबंधित काम नहीं हो रहा है, जिसकी वजह डाक कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल है। पोस्ट आफिस से संबंधित जीडीएस (ग्रामीण डाक सेवा) डाकिए गांवों में डाक पहुंचाने के अलावा अन्य कार्य भी करते हैं, लेकिन पिछले लंबे समय से उनकी 7वें पे कमिशन की मांग व अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा, जिसके चलते ग्रामीण डाकिए केंद्र सरकार के खिलाफ हड़ताल पर चले गए हैं। यूनियन प्रधान अमरीक सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हमें डाकिए के पद पर तैनात किया गया है, लेकिन लंबे समय से हमें मिलने वाली सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा रहीं। इस मौके पर मोहन लाल, बलविन्दर कौर, सिमरनजीत कौर, शिमला देवी, हरप्रीत कौर, हरपाल सिंह, वरिन्दर कुमार, दीवान, बलविन्दर, प्यारा लाल, अंजू, मनोहर लाल, दीपक, सूरत सिंह, नरेश सिंह, राजेश कुमार, सुखदेव राज आदि उपस्थित थे।

14 मई से 7वें पे कमिशन व अन्य मांगों को लेकर जीडीएस की ओर से की जा रही अनिश्चितकालीन हड़ताल

एक डाकिए के पास 30 से 70 किलोमीटर तक का एरिया

ग्रामीण डाकियों को 30 से 70 किलोमीटर तक का एरिया दिया जाता है, जहां वह डाक पहुंचाने के अलावा और भी काम करते हैं। वहीं, डाकघर के अंदर काम करने वालों को तो केंद्र सरकार की सुविधाओं का लाभ मिल जाता है, लेकिन दफ्तर से बाहर धूप, बारिश, तूफान में काम करने वाले कर्मियों को कोई लाभ नहीं मिलता।

मुख्य मांग

हड़ताल के दौरान वक्ताओं ने बताया कि हम डाक कर्मियों को डाक बांटना, बीमा करना, एसबी खाते खोलना, सुकन्या खाते खोलना, ब्रांचों में डाक पहुंचाना आदि काम करने पड़ते हैं। उन्होंने मांग की कि 7वां पे कमिशन लागू किया जाए और कमलेश चंद्र की रिपोर्ट लागू की जाए।

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