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500 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर

3 वर्ष पहले
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जयसिंह-वाला गांव के हाइटेक पॉलिटेक्निक कॉलेज को प्रबंधकों ने बिना किसी पूर्व सूचना अचानक बंद कर दिया है, जिससे यहां पढ़ने वाले करीब 500 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। टेक्निकल एजुकेशन बोर्ड नियमों का उल्लंघन करने पर कॉलेज प्रबंधन और सरकार के बीच पेंच फंसा हुआ है जबकि इस कशमकश में सैकड़ों विद्यार्थी 4 महीने से अन्य कॉलेजों में माइग्रेशन की प्रतीक्षा में बैठे हैं।

जनवरी में प्रबंधकों ने अपने निजी कारणों की वजह से अचानक हाइटेक पॉलिटेक्निक कॉलेज को बंद करने का फैसला कर लिया। नियमानुसार पढ़ रहे विद्यार्थियों का कोर्स पूरा करवाना होता है जबकि नए एडमिशन नहीं लेने होते। इसके बावजूद कॉलेज प्रबंधकों ने विद्यार्थियों के सैकड़ों भविष्य की परवाह नहीं की। विद्यार्थी दिसंबर टेस्ट के बाद जनवरी की एक महीने की छुट्टियां काटकर कॉलेज पहुंचे तो प्रबंधकों ने उन्हें कॉलेज बंद करने और उन्हें अन्य कॉलेजों में माइग्रेट करने का फैसला सुनाया। विद्यार्थियों से जनवरी में पीएसबीटीई के नाम 525 रुपए के ड्राफ्ट बनवाकर अलग-अलग कॉलेजों में माइग्रेशन के लिए आवेदन ले लिए गए। हालांकि जनवरी से समेस्टर शुरू होना था लेकिन लगातार 4 महीने से विद्यार्थियों को कॉलेज प्रबंधकों की ओर से आश्वासन दिए जा रहे हैं जबकि वे किसी भी कॉलेज में माइग्रेट नहीं हुए।

एजूकेशन

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यकायक बंद कर दिया पॉलिटेक्निक कॉलेज

पेरेंट्स से बोलना पड़ रहा है झूठ

विद्यार्थियों ने बताया कि वे अपने पेरेंट्स से लगातार झूठ बोल रहे हैं कि पढ़ाई अच्छी चल रही है, लेकिन उन्हें यह भी नहीं पता कि क्लासेज लगेंगी अथवा नए सिरे से अन्य कॉलेजों में पढ़ाई करनी होगी। विद्यार्थियों ने बताया कि उनके अधिकांश सहपाठी 10 से 15 हजार रुपए तक फीस भर चुके हैं, यही नहीं, कॉलेज बंद करने से पहले भी उनसे 3100 रुपए प्रति विद्यार्थी वसूले गए। कुछ बच्चों को माइग्रेशन के नाम पर अलग अलग कॉलेजों में भेजा गया, जहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनका माइग्रेशन नहीं हुआ है। पंजाब स्टेट बोर्ड आफ टेक्निकल एजुकेशन एंड इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग से एफिलिएटेड हाइटेक पॉलिटेक्निक कॉलेज की वेबसाइट पर सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के 3 साल डिप्लोमा की 60-60 सीटें अंकित हैं। कॉलेज में उत्तरप्रदेश व बिहार से भी हजारों विद्यार्थी डिप्लोमा कर रहे हैं, पढ़ाई कॉलेज बंद होने से अधर में लटक गई है।

स्टूडेंट्स बोले-

बंद करने के लिए नहीं ली परमिशन

कॉलेज को बंद करने के लिए प्रबंधकों ने बोर्ड से किसी प्रकार की कोई परमिशन नहीं ली। बोर्ड के अनुरूप प्रोसीजर प्रॉपर फॉलो नहीं करने पर बाकायदा गवर्नमेंट लेवल पर केस डिसाइड हो रहा है। बोर्ड नियमानुसार तीसरे और पांचवें सेमेस्टर में ही माइग्रेशन का प्रावधान है और वो भी शेड्यूल के अनुसार लेकिन प्रबंधन ने सिर्फ बच्चों के माइग्रेशन का आवेदन किया है। राजीव पुरी, रजिस्ट्रार, डीटीई, चंडीगढ़।

माइग्रेशन के लिए किया हैं आवेदन

बोर्ड को कॉलेज बंद करने के बारे में लिखकर दे रखा है, वहीं जनवरी में विद्यार्थियों की माइग्रेशन उनके चुनिंदा कॉलेजों में करने के लिए भी आवेदन किया है। इस संबंध में चंडीगढ़ आए हैं, इनके फैसले पर अगले स्टेप के बारे में सोचेंगे। सुरजीत सिंह, एमडी, हाइटेक पॉलिटेक्निक कॉलेज बठिंडा

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