सिविल अस्पताल को होगी 3 करोड़ 75 लाख की इनकम, मरीजों को मिलेगी बेहतर सुविधाएं
जिले में हर साल 1100 नए असला लाइसेंस बनाने वाले और 25 हजार रिन्यू करवाने वालों की जेब पर सीधा 7 करोड़ 69 लाख रुपए का बोझ प्रति वर्ष पड़ेगा। यह बोझ पंजाब के मुकाबले बठिंडा जिले के असला धारकों पर सर्वाधिक है। इसका बड़ा कारण बठिंडा में नए लाइसेंस की फीस 3 हजार है वही समाज सेवा के नाम पर 20 हजार की अलग से पर्ची काटी जाती है। दूसरी तरफ लोगों के लिए फायदे वाली बात यह है कि डोप टेस्ट करवाने की एवज में सेहत विभाग को 3.75 करोड़ की आय हर साल होगी। इसमें हर साल 1000 से 1100 नए लाइसेंस बनने से डेढ़ करोड़ की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे अस्पतालों में लोगों को बेहतर सुविधा दी जा सकेगी। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लाइसेंस रिन्यू करवाने को डोप टेस्ट की फीस में दो माह में चौथी बार बढ़ोतरी की है। शुरू में जहां फीस 320 रुपए रखी गई वही इसे बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया। हाल ही में फीस को 500 से 820 रुपए किया गया था। पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन ने नई अधिसूचना जारी कर फीस 1500 रुपए निर्धारित कर दी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने की डोप टेस्ट फीस में दो माह में चौथी बार 5 गुणा बढ़ोत्तरी
आम लोगों को फायदा
बठिंडा सिविल अस्पताल में ही हर साल 3 करोड़ 75 लाख रुपए की आय होने की संभावना है। इससे अस्पतालों में बेहतर सुविधा देने के साथ खाली पदों पर नए डाक्टरों की नियुक्ति में भी आसानी होगी। वर्तमान में सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 700 मरीज उपचार के लिए आते हैं। इस दौरान फंड की कमी के चलते कई आधुनिक सुविधाएं लेने के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है। वही प्रशासन के दावो को सही माने तो काटी जाने वाली 20 हजार प्रति लाइसेंस फीस का इस्तेमाल गरीब व जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जा रहा है।
नशेड़ियों को नहीं मिलेगा लाइसेंस
पंजाब में हेल्थ कार्पोरेशन भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इसी दौरान असला लाइसेंस का गलत इस्तेमाल होने से रोकने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने ऐसे लोगों को लाइसेंस देने से मनाही की जो नशे का सेवन करते हैं। इसके लिए डोप टेस्ट जरूरी कर दिया गया। इस मामले में आदेश जारी होने के बाद शुरू में हेल्थ विभाग के अधिकारियों ने अपने स्तर पर फीस तय कर दी थी। इसी के चलते फीसें एक समान नहीं थी।
डोप टैस्ट के लिए असले समेत ओपीडी में घूमता आवेदक।
हेल्थ एंड फेमिली डिपार्टमेंट ने जारी किया फरमान
हाल ही में हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट के प्रिंसीपल सेक्रेटरी अंजली भांवरा ने सभी सिविल अस्पताल प्रबंधकों को पत्र जारी कर डोप टेस्ट की फीस 1500 रुपए करने का फरमान जारी कर दिया। 17 अप्रैल 2018 को जारी पत्र में सिविल अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं में सुधार के लिए नया लाइसेंस जारी करने व रिन्यू करवाने के लिए होने वाले डोप टेस्ट की फीस 1500 रुपए रखने की हिदायत दी गई।
एेसे पड़ेगा 7.69 करोड़ रुपए का बोझ
अब इसमें डोप टेस्ट के 1500 रुपए अलग से जोड़ने के बाद जहां नया लाइसेंस अप्लाई करने वाली की जेब से 24,500 रुपए निकलेंगे। जिले में प्रतिदिन चार नए असला लाइसेंस अप्लाई हो रहे हैं जबकि असलहा लाइसेंस धारकों की संख्या 25 हजार हो चुकी है। इस तरह से हर साल बनने वाले 1100 नए लाइसेंस बनाने वालो की जेब से 24 हजार 500 रुपए प्रति के हिसाब से दो करोड़ 69 लाख रुपए निकलेंगे। वही अब डोप टेस्ट करवाने वाले 25 हजार लोगों को 1500 रुपए प्रति व्यक्ति हर साल तीन करोड़ 75 लाख रुपए अपनी जेब से देने पड़ेंगे। लाइसेंस रिव्यू करवाने के लिए निर्धारित 500 रुपए प्रति लाइसेंस फीस देने पर एक करोड़ 25 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।