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हीमोफीलिया से जिले में 6 लोग ग्रस्त

3 वर्ष पहले
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जिंदगी को मौत से भी बदतर बना देने वाली हीमोफीलिया से जिले में करीब 6 लोग ग्रस्त हैं। हैरत की बात ये है कि इस बीमारी पर काबू पाने या इलाज करने के लिए सिविल अस्पताल में रेफर की पर्ची के अलावा कुछ भी नहीं है। मरीजों को पहले पीजीआई भेजा जाता है, लेकिन वहां भी हीमोफीलिया की पूरी जांच नहीं हो पाती है। इसके बाद मरीज को चेकअप के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। हीमोफीलिया सेल को छोडि़ए फैक्टर-8 व 9 का इंजेक्शन भी उपलब्ध होने में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके लिए उन्हें दिल्ली में स्थित लोक नायक अस्पताल जाना पड़ता है। फैक्टर आठ इंजेक्शन की कीमत करीब 11 हजार रुपए व फैक्टर 9 की कीमत 20 हजार रुपए से अधिक है।

नाम न छापने की शर्त पर हीमोफीलिया के मरीज के परिजनों ने बताया कि बठिंडा सिविल अस्पताल के साथ-राज्य के किसी भी अस्पताल में इसका सही उपचार न होने से दिल्ली जाना पड़ता है। इलाज काफी महंगा है। सरकार द्वारा भी इस पर कोई रियायत नहीं दी जाती है। इस संबंध में चिल्ड्रन अस्पताल में तैनात डाक्टर सतीश जिंदल ने बताया कि बच्चों में हीमोफीलिया की पहचान होने पर पहल के आधार पर इलाज किया जाता है लेकिन कंडीशन को देखते हुए उन्हें रेफर किया जाता है।

सिविल अस्पताल में इलाज नहीं, मिलती है रेफर पर्ची

हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चा।

मुफ्त देते हैं ब्लड : सरां

ब्लड बैंक इंचार्ज डाॅ. इंदरप्रीत सरां ने कहा कि ब्लड बैंक से लगभग 8 से 10 लोग फ्रोजन प्लाजमा लेकर जाते हैं। ऐसे मरीजों को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध करवाया जाता है।

पंजाब में नहीं है फ्री इलाज

अशोक वासी मैहना चौक ने बताया कि उनका 27 वर्षीय पुत्र जोगेश भी हीमोफीलिया से ग्रस्त है। हीमोफीलिया का हरियाणा, राजस्थान, बेंगलुरू, दिल्ली सहित कई राज्यों में इलाज फ्री होता है, लेकिन पंजाब में नहीं है। जिला स्तर पर हीमोफीलिया की टेस्ट व इलाज की व्यवस्था की जानी चाहिए। सरकार फ्री इलाज के लिए अस्पतालों में इंजेक्शन का प्रबंध किया जाए।

सहजप्रीत के पैर के जोड़ निकल गए

कौर सिंह वासी कोटशमीर ने बताया के उनके बेटे अभिजोत ( 6 वर्ष), सहजप्रीत हीमोफीलिया से ग्रस्त है। पीजीआई के अलावा अन्य अस्पतालों में इलाज न होने से दोनों बच्चों का इलाज दिल्ली के लोक नायक अस्पताल से करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया से पीड़ित होने के कारण सहजप्रीत के पैर के जोड़ निकल गए हैं।

एसएमओ ने भी माना - नहीं है इलाज की व्यवस्था

रजिस्ट्रेशन शुरू, फ्री होगी इलाज

सरकार की ओर हीमोफीलिया से ग्रस्त मरीजों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिसमें फरीदकोट, पटियाला व लुधियाना शामिल है। इसमें मरीजों के पंजीकृत होने से उन्हें इलाज मुफ्त मिलेगा। फिलहाल विभाग को अलग से बजट की जरूरत पड़ेगी। पंजीकृत न होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा था।

पूर्व सीएम बादल से लगा चुके हैं गुहार

राजू वासी प्रताप नगर गली नंबर 2 ने बताया कि उनका 11 वर्षीय पुत्र नमन हीमोफीलिया से पीड़ित है। उन्होंने बताया कि बच्चे में इनोवेटर होने के कारण इंजेक्शन का प्रभाव कम हो गया है। इस कारण उन्हें अब इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश बादल, पूर्व उपमुख्य मंत्री सुखबीर बादल से मदद की गुहार लगा चुके हैं।

हीमोफीलिया के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था न होने से पीडितों को दाखिल नहीं किया जाता। उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। इस बारे में सरकार व विभाग को पत्र लिखा है। मरीज को मामूली चोट लगने पर भी खून का बहाव आसानी से रुक नहीं पाता। विशेषज्ञ की सलाह पर फैक्टर की डोज देकर कमी को पूरा किया जाता है। डाॅ. सुखजिंदर सिंह गिल, एसएमओ।

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