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वन टाइम सैटलमेंट के तहत रेगुलर होंगी अवैध बिल्डिंगें, मई अंत में जारी हो सकती है पॉलिसी

3 वर्ष पहले
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शहर में बन चुकी अवैध बिल्डिंगें जल्द ही रेगुलर हो सकेंगी। जिसका फायदा जहां निगम को मिलेगा,वहीं अवैध निर्माण कर चुके लोगों को कार्रवाई का डर नहीं सताएगा। पंजाब सरकार की तरफ से अवैध बिल्डिंगों को रेगुलर करने के लिए वन टाइम सैटलमेंट स्कीम (ओटीएस) जल्द ही जारी करेगा। हालांकि, सरकार ने जनवरी में ड्राफ्ट पॉलिसी भी जारी कर निगमों से सुझाव व एतराज भी मांगे थे। बीते दिनों कैबिनेट मीटिंग में पॉलिसी को मंजूरी भी मिलनी थी, लेकिन शाहकोट में उपचुनाव के चलते इसे पेडिंग रखा था। उम्मीद जताई जा रही है कि मई के आखिरी दिनों में कैबिनेट में इस पॉलिसी को हरी झंडी दे दी जाएगी, जिसके बाद इसे लागू करने के लिए प्रदेश के तमाम नगर निगमों व नगर काउंसिलों को भेजी जाएगी। इस पॉलिसी में अप्रूव्ड एरिया में वॉयलेशन कर बनी बिल्डिंगों को रेगुलर करने के लिए 31 मार्च 2018 तक की डेडलाइन रखी गई थी। इस लिहाज से पहले बन चुकी बिल्डिंगों के साथ अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंगों को भी इसका लाभ मिल जाएगा। हालांकि इन्हें रेगुलर करते समय उनमें पार्किंग और फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड पूरे होने लाजिमी होंगे।

अप्रूव्ड एरिया में वॉयलेशन कर बनी बिल्डिंगों को रेगुलर करने को मार्च 2018 की थी डेडलाइन

नई पॉलिसी में पार्किंग को लेकर फंस सकता है पेंच

नई पॉलिसी में पार्किंग को लेकर पेंच फंसेगा। पंजाब में 1997 से पहले कंस्ट्रक्शन के वक्त पार्किंग छोड़ने की कोई शर्त नहीं थी। तब 100 फीसदी एरिया कवर किया जा सकता था। इसके बाद पार्किंग का कुछ फीसदी के हिसाब से एरिया छोड़ना तय हुअा। 2010 में इसे इक्यूवेलेंट कार स्पेस(ईसीएस) में बदल दिया गया, जिसमें कवर्ड एरिया के हिसाब से कार स्पेस और उसके हिसाब से एरिया छोड़ने के बारे में तय किया गया था। हालांकि यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में क्लियर होगा लेकिन यह संभावना है कि ज्यादातर बिल्डिंगों में पार्किंग स्पेस न होने की वजह से उन्हें 1997 से पहले के कंस्ट्रक्शन के तौर पर दिखा रेगुलर किया जा सकता है। वहीं, इसमें फ्रंट सैट बैक छोड़ने की भी शर्त रखी जा रही है जो कॉमर्शियल के लिए 20 फीसदी और इंडस्ट्रियल के लिए 30 फीसदी बनता है।

रिहायशी एरिया में परेशानी

सरकार वॉयलेशन कर बनी बिल्डिंग मालिकों को तो खुश कर रही है लेकिन इससे अप्रूव्ड और स्कीम एरिया के रिहायशी इलाकों में बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। ज्यादातर रिहायशी इलाकों में कॉमर्शियल काम होने लगा है। अभी यह काम गुपचुप तरीके से होता है और कंप्लेंट पर निगम एक्शन भी ले लेता है। जब पॉलिसी में यह रेगुलर हो जाएंगे तो फिर धड़ल्ले से कॉमर्शियल एक्टिविटी होगी।

सीएलयू, कंस्ट्रक्शन चार्ज लगेंगे

बिल्डिंग परिसर में फायर फाइटिंग की व्यवस्था यकीनी बनानी होगी। वहीं पार्किंग की व्यवस्था बनानी होगी। बिल्डिंग में पार्किंग नहीं हो सकती, तो विकल्प के रूप में आसपास किराए पर या जगह खरीदकर पार्किंग की व्यवस्था बना सकते है। सरकारी जगहों पर कब्जे कर बनाई गई इमारतों को रेगुलर नहीं किया जाएगा। इसके अलावा बन चुकी बिल्डिंगों का सीएलयू, कंस्ट्रक्शन चार्ज आदि फीस का भुगतना करना होगा।

ऐसे मिलेगा फायदा

सरकार द पंजाब वन टाइम वॉलंटियर डिसक्लोजर एंड सेटलमेंट ऑफ वॉयलेशन ऑफ द बिल्डिंग ऑर्डिनेंस-2018 ला रही है। सरकार के मुताबिक पब्लिक हित में यह बिल्डिंग तय पार्किंग नोर्मस और फायर सेफ्टी स्टेंडर्ड होने पर रेगुलर कर दी जाएंगी। सरकार के मुताबिक यह बिल्डिंगें काफी पुराने समय से बनी हैं, इसलिए यह संभव नहीं कि इन्हें तोड़ दिया जाए। नोटिफिकेशन जारी होने के एक महीने तक अप्लाई करने और फिर दो महीने डॉक्यूमेंट्स जमा कराने का टाइम मिलेगा। इसके बाद जो बच जाएंगी, उनके सीवरेज-पानी कनेक्शन काटकर बिल्डिंग सील या तोड़ दी जाएगी। स्कीम का लाभ लेने के बदले में लोगों को तयशुदा रकम का भुगतना करना होगा। अगर यह स्कीम लागू होती है, तो इसका मकसद नगर निगमों की वित्तीय स्थिति को सुधारना है। गौरतलब है कि लुधियाना, पटियाला, अमृतसर व जांलधर के मेयरों ने यह स्कीम लाने के लिए स्थानीय निकाय मंत्री से सिफारिश भी की थी।

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