मार्च में हेल्थ विभाग ने भरे खाद्य पदार्थों के 60 सैंपल, 12 फेल, कानूनी प्रकिया की तैयारी
मार्च में हेल्थ विभाग की टीमों ने शहर के विभिन्न स्थानों से खाद्य पदार्थों के 60 सैंपल भरे, जिन्हें जांच के लिए खरड़ स्थित लेबोरेटरी भेजा गया। डीएचओ अशोक मोंगा ने बताया कि विभाग की ओर से भरे 60 सैंपलों में से 12 फेल पाए गए हैं। इस बारे में विभाग की ओर से कानूनी प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि हेल्थ विभाग ने राज्य सरकार की हिदायत पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत मार्च में 34 लाइसेंस और 50 रजिस्ट्रेशन दुकानदारों के किए गए है। डीएचओ अशोक मोंगा ने बताया कि 12 लाख रुपए तक सेल वाले को लाइसेंस अप्लाई करने वालों की सरकारी फीस बहुत कम है। इसके लिए केवल 100 रुपए सालाना खर्च करने पड़ते है। 12 लाख के बाद ऊपर अलग स्लैब बनाया गया है। लाइसेंस न बनाने की सूरत में दुकानदार व रेहड़ीवाले को छह माह की सजा व पांच लाख का जुर्माना होगा। लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन के बगैर कोई भी फूड प्रोडक्ट तैयार नहीं किया जा सकता, न ही नियमानुसार इसकी बिक्री हो सकती है। फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों का मेडिकल फिटनेस टेस्ट भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि चैकिंग दौरान लाइसेंस न होने तथा फैक्ट्री में गंदगी पाए जाने पर फैक्ट्री संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी। डीएचओ अशोक मोंगा ने बताया कि सेहत विभाग द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया है। गठित की गई टीम अनियमितताओं के साथ संचालित की जा रही आईसक्रीम फैक्ट्री पर भी दबिश दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अनियमितताओं के साथ चलाई जा रही आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी दुकानदार गलत सामान बेचता पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। आने वाले समय में रेहडिय़ों, होटलों तथा आइसक्रीम फैक्ट्री पर छापामारी की जाएगी, क्योंकि समय-समय पर उन्हें शिकायतें मिल रही है।