पंजाब में बढ़ रही हैं फैटी लीवर रोगियों की संख्या, 80 % डैमेज होेने पर चलता है पता
पिछले कुछ सालों में पंजाब में फैटी लीवर रोगियों की संख्या में बड़ी तेजी से इजाफा दर्ज हुआ हैं। बिगड़ते खान-पान की वजह से लगभग हर घर में कोई न कोई सदस्य फैटी लीवर की समस्या से जूझ रहा हैं। अधिकांश मामलों में 80 प्रतिशत लीवर डैमेज होने के बाद ही इस बीमारी का पता चलता हैं, जिस कारण मरीज की जान खतरे में पड़ जाती हैं।
ये है फैटी लीवर
शरीर के अन्य भागों की भांति जब लीवर में भी चर्बी जमा हो जाती है तो ऐसी स्थिति को फैटी लीवर कहा जाता है। लीवर में एकत्रित हुआ फैट उसके नॉर्मल सेल्स को खत्म करना शुरू कर देता है। इसका असर यह होता है कि लीवर बीमार होने लगता है। इसकी वजह से भविष्य में हेपेटाइटिस, सिरोसिस, फाइब्रोसिन और कैंसर जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
कारण/रिस्क फैक्टर
इस बीमारी का मुख्य कारण मोटापा है। बहुत ज्यादा खाना, जंक फूड ज्यादा खाना, बैलेंस्ड डाइट न लेना, एक्सरसाइज न करना, इन सब कारणों से शरीर में फैट जमा होने लगता है। इसके अलावा, डायबिटीज होने पर भी फैटी लीवर की समस्या हो सकती है। वहीं, थाइरायड भी इसकी एक बड़ी वजह है।
ऐसे कर सकते हैं बचाव| फैटी लीवर से बचाव हेतु मोटापा न बढ़ने दे। संतुलित आहार का सेवन करे और रोजाना योग, व्यायाम और सैर करें। शराब और सिगरेट से दूरी बनाकर रखे और समय-समय पर रूटीन जांच करवाते रहे ताकि समय रहते लीवर के फैटी होने की जानकारी मिलने पर उपचार शुरू किया जा सके।
डॉ. अजेश बांसल, डीएम गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी दिल्ली हार्ट इंस्टिट्यूट एंड मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल।
लक्षण
पीलिया, भूख न लगना, पेट के अंदर पानी भर जाना आदि फैटी लीवर के लक्षण हैं। फैटी लीवर के एडवांस स्टेज में पहुंच जाने पर मरीज के दिमाग पर भी असर पड़ने लगता है, उसका दिमाग काम नहीं करता, मरीज अपना होश खोने लगता है। उसे खून की उल्टियां होने लगती है।
बढ़ती हैं दूसरी बीमारियां
डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी में 80 प्रतिशत तक लीवर क्षतिग्रस्त होने के बाद बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं और जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। फैटी लीवर की वजह से रोगी को दूसरी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। ज्यादातर मामलों में फैटी लीवर की पहचान तब हो पाती है जब वह सिरोसिस में बदल चुका होता है।