जेआईटीएफ कंपनी की तरफ से 1 मई को डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम छोड़ने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में नगर निगम बठिंडा की तरफ से दायर रिव्यू पिटीशन से कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है। हालांकि, शुक्रवार को दायर पिटीशन पर सुनवाई होनी थी और निगम को अपना पक्ष रखना था, लेकिन जेआईटीएफ कंपनी के वकील हाजिर नहीं होने के कारण सुनवाई टाल दी गई और अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की गई है। इसके चलते निगम ने अपने वकील के जरिए एनजीटी को अपना जबाव जमा करवा दिया है।
इससे पहले नगर निगम ने दर्ज बयान में हवाला दिया कि जेआईटीएफ के साथ हुए एग्रीमेंट में लंबे समय तक घरों से कचरा उठाने को लेकर सहमति हुई है व अब कंपनी इससे भाग रही है। जेआईटीएफ ने काम करने से मना कर नियमों की अवहेलना की है। वहीं जेआईटीएफ ने मामले में तर्क दिया कि पंजाब में ही दूसरे स्थानों में दी जाने वाली टिपिंग फीस 900 से लेकर 1300 रुपए प्रति टन है। जबकि बठिंडा में 366 रुपए प्रति टन के हिसाब से भुगतान हो रहा है। इन दलीलों के बाद एनजीटी ने दोनों पक्षों को एक मुश्त योजना तैयार कर काम करने के लिए भी समय दिया लेकिन इसमें सहमति नहीं बनने से केस अदालत में चल रहा है।
याचिका में नगर निगम ने नियमों और एग्रीमेंट का हवाला देकर कूड़ा कलेक्शन का काम जेआईटीएफ कंपनी से करवाने के लिए रखी थी मांग
300 टन कचरा सॉलिड वेस्ट प्लांट को देना होगा
एनजीटी की तरफ से डेढ़ माह आगे की दी गई तारीख के बाद एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि निगम को डोर टू डोर कचरा उठाने के काम से जल्द छुटकारा मिलने वाला नहीं है। ऐसे में 10 जुलाई तक निगम को अपने स्तर पर ही कचरा उठाने के साथ-साथ सॉलिड वेस्ट प्लांट को चलाने के लिए 300 टन कचरा उपलब्ध करवाना ही पड़ेगा।
27 अप्रैल को एनजीटी में दायर कर दी थी अपील
27 अप्रैल को एनजीटी में यह अपील भी दायर कर दी कि कचरा कलेक्शन का काम जेआइटीएफ कंपनी से ही कराया जाए। क्योंकि जेआइटीएफ ने निगम के साथ वर्ष 2011 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चलाने के साथ-साथ डोर टू डोर एवं सेकेंडरी प्वाइंट्स से कचरा कलेक्शन करने का भी 25 वर्ष का कांट्रैक्ट किया हुआ है। नियमों के अनुसार कांट्रैक्ट कर कोई भी कंपनी काम बीच में नहीं छोड़ सकती।
कपंनी ने कहा- निगम ने पूरा नहीं किया कोई वादा
कंपनी ने कहा था कि उक्त पिटीशन गलत है, निगम ने कंपनी के साथ किए गए एग्रीमेंट के मुताबिक एक भी वादा पूरा नहीं किया है। न ही कंपनी को टिपिंग फीस मिल रही है और न ही उसमें बढ़ोतरी की जा रही है। इतनी कम टिपिंग फीस में काम करने में असमर्थ है।