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सीयूपीबी के छात्र सुशांत सागर की मौत का मामला

3 वर्ष पहले
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सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब में 23 अप्रैल को छात्र सुशांत सागर की मौत के मामले में जांच करवाने को लेकर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जांच समिति के समक्ष हाजिर होकर अपने बयान दर्ज करवाए।

इस दौरान छात्रों ने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्हें दस्तावेजों की कॉपियों के अलावा कमेटी के सामने पेश करने के लिए अन्य सबूत उपलब्ध नहीं करवाए गए। वहीं छात्रों ने कहा कि कुछ छात्रों को भेजे गए एक पत्र में, समिति ने उन्हें अपने बयान दर्ज करने और उनके दावों की पुष्टि करने के सबूत पेश करने से पहले उपस्थित होने का निर्देश दिया था। उन्होंने यह भी मांग की कि यूनिवर्सिटी को सभी छात्रों के लिए एक आम सूचना जारी करनी चाहिए, जो उन सभी से पूछे जो समिति में आने के लिए गवाही देने में रूचि रखते थे। गौर हो कि 23 अप्रैल को छात्र सुशांत सागर उल्टी करने के बाद बास्केटबॉल कोर्ट पर गिर गया था, जिसको यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में पुनर्जीवित करने के प्रयास विफल हुए। जिसके बाद सागर को एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। छात्रों ने परिसर में पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की प्रतीक्षा करते समय वक्त बर्बाद करने का अधिकारियों पर आरोप लगाया था।

कमेटी के सामने विद्यार्थियों केे बयान दर्ज, यूनिवर्सिटी अधिकारियों पर केस से संबंधित जरूरी दस्तावेज व सबूत न देने के लगाए आरोप

ये मुख्य सबूत नहीं दिए

23-24 अप्रैल के मुख्य द्वार के दोनों किनारों और स्वास्थ्य केंद्र को कवर करने वाले कैमरे की सीसीटीवी फुटेज, स्पोर्ट्स आफिसर व मेडिकल आफिसर के आफिशियल ड्यूटी के घंटों के समय की टाइमिंग, कर्मचारियों के मुख्य द्वार से आने जाने की एंट्रियों के रिकाॅर्ड, मेडिकल आफिसर डॉ. मरिदुल मित्तल की तैयार की गई केस रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियो रिकाॅर्डिंग, एफआईआर व डीडीआर की कॉपी शामिल हैं। जबकि अधिकारियों ने इस कारण का हवाला दिया कि उन्हें डर था कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, जो जांच में बाधा डालती है। वहीं छात्रों ने कहा कि उनके कारणों का कोई आधार नहीं है क्योंकि हमने प्रतियां मांगे हैं व मूल दस्तावेज नहीं हैं।

गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं छात्र

समिति के अध्यक्ष, बठिंडा एसडीएम बलविंदर सिंह ने कहा कि अधिकारियों ने केस की कॉपी इस सबूत के रूप में नहीं दीं, क्योंकि उन्होंने उन सबूतों के रूप में पूछे जिन्हें पहले से ही समिति के सदस्यों द्वारा जांच लिया गया है। जबकि छात्र जांच में देरी और समिति को गुमराह करने के लिए व्यर्थ प्रयास कर रहे हैं। समिति हमेशा साक्ष्य देने के लिए खुली रही है। छात्रों ने समिति के साथ कई अन्य मुद्दों को उठाया था, जो सुशांत सागर की मौत से संबंधित नहीं थे और समिति ने उन्हें नहीं लिया क्योंकि इसे केवल लापरवाही, यदि कोई हो, पर देखने के लिए गठित किया गया है। जबकि विश्वविद्यालय के अधिकारियों का हिस्सा विशेष रूप से एम्बुलेंस ड्राइवर है।

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