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गिल कमीशन को चुनौती, सरकार को नोटिस

3 वर्ष पहले
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‘कमीशन की सिफारिशों का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं’

चंडीगढ़ | शिरोमणि अकाली और बीजेपी सरकार के दौरान राजनीतिक रंजिश के चलते झूठे केस दर्ज करने की जांच को लेकर जस्टिस मेहताब सिंह गिल कमीशन के गठन को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर जस्टिस राजन गुप्ता ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बठिंडा के सरन दास गर्ग की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि जस्टिस गिल कमीशन के पास कोई इनवेस्टीगेशन मशीनरी नहीं। लिहाजा कमीशन की सिफारिशों का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं है। याचिका में कहा गया है कि उनके दो चेक से धोखे से दो करोड़ रुपए का नुकसान उन्हें पहुंचाया गया। मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दी तो एफआईआर दर्ज कर ली गई। बठिंडा के चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट ने इस मामले में जांच एजेंसी की फाइनल रिपोर्ट को मंजूर न करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए। याचिका में कहा गया कि आरोपी पक्ष ने जस्टिस गिल कमीशन को इस मामले में अप्रोच किया। कमीशन ने कहा कि इस मामले में झूठा केस दर्ज किया गया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया है कि कमीशन के पास कोई इनवेस्टीगेशन मशीनरी नहीं है फिर वे इस तरह के नतीजे पर कैसे पहुंच सकते हैं। ऐसे में कमीशन की सिफारिशों का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं होना चाहिए।

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