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बठिंडा क्लस्टर से जेआईटीएफ को रोज 300 टन कचरा देने के थे आदेश, 200 ही नहीं पहुंच रहा

3 वर्ष पहले
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली (एनजीटी) के आदेशों के मुताबिक बठिंडा नगर निगम समेत आसपास की 18 नगर काउंसिलों को 1 मई से सॉलिड वेस्ट प्लांट चला रही जेआईटीएफ कंपनी को प्रतिदिन 300 टन कचरा देना है, लेकिन बठिंडा क्लस्टर से प्रतिदिन करीब 200 मीट्रिक टन से भी कम कचरा ही प्लांट में पहुंच पा रहा है।

चूकिं निगम ने एनजीटी से कहा है कि वह कंपनी को सॉलिड वेस्ट प्लांट चलाने के लिए जीरो टीपिंग पर फीस पर प्रतिदिन 300 टन कचरा देगी, लेकिन 1 मई से कचरा उठाने का काम अपने हाथों में लेने के बाद न तो नगर निगम बठिंडा और नहीं आसपास की 18 नगर काउंसिलों पूरा कचरा कंपनी देने में सफल हो पा रही है। वहीं कंपनी ने नगर काउंसिलों की तरफ से भेजे जा रहे कचरे में मिट्टी भी भेजने पर आपत्ति दर्ज करवाई है। इसी मसलों को लेकर मंगलवार को स्थानीय निकाय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कम निगम कमिश्नर डॉ. रिशीपाल सिंह ने सभी नगर काउंसिलों के ईओ व अधिकारियों से बैठक की। उन्होंने सभी ईओ काे हिदायत दी कि वह अपनी यूएलवी से पूरा कचरा कंपनी के प्लांट तक पहुंचाए, ताकि कंपनी को एनजीटी में निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मौका न मिल सके।

उन्होंने कहा कि ईओ अपनी देखरेख में प्लांट को भेजे जाने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रतिदिन उन्हें भेजे। उन्होंने यह भी हिदायत दी कि काउंसिल अपने स्तर पर भेजे जाने वाले कचरा को कम समय में ज्यादा से ज्यादा भेजे और कचरा उठाने में आ रही दिक्कतों को भी अपने स्तर पर हल करे।

1 मई से निगम अपने स्तर पर उठा रहा कचरा

हिदायत जारी- हर हाल में पहुंचे 300 टन कचरा

14 दिन में 200 एमटी भी नहीं पहुंचा कचरा

18 की सुनवाई में कंपनी दे सकती है रिपोर्ट

जेआईटीएफ के खिलाफ एनजीटी में दायर रिव्यू पिटीशन की सुनवाई 18 मई को होगी। इसमें निगम द्वारा दायर याचिका के खिलाफ कंपनी के दिए जबाव पर सुनवाई है। यह सुनवाई निगम व कंपनी दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है, अगर एनजीटी के जबाव पर सहमति होते निगम की याचिका रद्द कर देती है, तो निगम अपने स्तर पर कचरा उठाने का काम जारी रखना पड़ेगा। यदि निगम की याचिका को एनजीटी सही मानते हुए उस पर सुनवाई करती है, तो कंपनी को फिर से कचरा उठाने का काम करने का आदेश एनजीटी दे सकती है।

1 मई 181

2 मई 144

3 मई 185

4 मई 192

5 मई 112

6 मई 42

7 मई 185

8 मई 142

9 मई 126

10 मई 132

11 मई 164

12 मई 166

13 मई 49

14 मई 150

टीपिंग फीस न मिलने पर छोड़ा था कंपनी ने काम

बताते चले कि जेआईटीएफ कंपनी का कहना था कि काउंसिलों उन्हें कचरा उठाने की एवज में मिलने वाली टीपिंग फीस समय पर नहीं दे पा रही है। इसके चलते कंपनी ने जनवरी में एनजीटी में याचिका दायर कचरा उठाने का काम छोड़कर जीरो टीपिंग फीस पर केवल उसे रिप्रोसेस कर खाद व आरडीएफ तैयार करने की बात कहीं थी। कंपनी ने कहा था कि उनका बठिंडा क्लस्टर की तरफ से करीब दो करोड़ रुपए की टीपिंग फीस लंबे समय से बकाया पड़ी है।

प्लांट चलाने के लिए प्रतिदिन 300 टन कचरा

एनजीटी में दायर याचिका में कंपनी ने कहा था कि केवल बठिंडा निगम से 110 टन कचरा ही प्लांट पर पहुंच रहा है। कंपनी की तरफ से लगाया गए सॉलिड वेस्ट प्लांट की कैपेसिटी 300 से 350 टन है, इससे कंपनी के रूटीन के खर्च पूर नहीं हो रहे है। ऐसे में वह पावर प्लांट लगाने के लिए प्रतिदिन 500 टन कचरा चाहिए, जोकि बठिंडा क्लस्टर नहीं दे सकता है, जबकि निगम ने अपने जबाव में कहा था कि अगर कंपनी पावर प्लांट लगाती है, तो वह 500 टन कचरा भी दे सकती है।

आंकड़े मैट्रिक टन

1 मई से बठिंडा निगम समेत काउंसिल अपने स्तर पर उठा रही है कचरा

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