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14 हजार की बजाय कोऑपरेटिव बैंक दे रहे थे Rs.10 हजार कृषि लोन मलूका और ढढ्ढे में बनाया बंधक, बठिंडा पहुंचे तो बैंक स्टाफ गायब

3 वर्ष पहले
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फसली सीजन को लेकर सहकारी सभाओं के रजिस्ट्रार की तरफ से जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार कर्ज न मिलने के विरोध में जिले के किसानों ने सोमवार को बठिंडा के साथ गांव मलूका व ढढ्ढे में कोऑपरेटिव बैंक की ब्रांचों के बाहर धरना लगाकर स्टाफ को बंदी बना लिया।

इसमें से बठिंडा बैंक की ब्रांच के स्टाफ को जब धरना लगाने का पता लगा तो वह पहले ही बैंक छोड़कर हेड आफिस चले गए। इस दौरान किसान नई गाइडलाइन के अनुसार 14 हजार रुपए कैश कर्ज देने की बात कर रहे हैं, वहीं बैंक अपनी आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण किसानों को 10 हजार रुपए लोन दे रहा है। इस बारे में अब बैंक की ओर से हैड आफिस को पूरी जानकारी दी गई है। जहां से जैसे आदेश आएंगे उसको वैसे लागू कर दिया जाएगा। जबकि बैंक के सामने इस समय सबसे बडी समस्या आरबीआई के आदेशानुसार सीआरआर (कैश रिजर्व रेशो 9 फीसदी) मेंटेन करने की आ रही है।

फसली कर्ज पर 4 तो लिमिट कर्ज पर लगता है 13% ब्याज

बठिंडा स्थित कोऑपरेटिव बैंक के हेड आफिस की जिले में 39 ब्रांचें हैं, जिसके अंडर 194 सोसायटियां आती हैं। इन सभी सोसायटियों के करीब 85 हजार मेंबर हैं, जिनको हर साल फसलों के लिए 2 बार लोन दिया जाता है। किसान अब नरमे व धान की फसल के लिए बैंकों के पास लोन लेने के लिए पहुंच रहे हैं। मगर बैंक के नई गाइडलाइन के अनुसार लोन न देने को लेकर किसानों ने आरोप लगाया कि फसली कर्ज पर जो लोन दिया जाता है उस पर 4 फीसदी ब्याज होता है। मगर लिमिट कर्ज पर 13 फीसदी ब्याज होता है। इस ब्याज के अंतर के चलते ही किसानों को पूरा लोन दिया जा रहा है। इसके विरोध में बठिंडा में लगाए गए धरने के दौरान किसान लखविंदर सिंह, गुरदेव सिंह आदि ने कहा कि बैंक रजिस्ट्रार की गाइडलाइन को पूरा नहीं मान रहा है, जिसके विरोध में उनको संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

गाइडलाइन के हिसाब से कर्ज नहीं मिलने पर 37 ब्रांचों का घेराव

बैंक प्रबंधकों की अपील किसी की बातों में न आएं किसान

बैंकों के सामने कैश रिजर्व रेशो को मेनटेन करने की दिक्कत

बठिंडा की दाना मंडी स्थित कोऑपरेटिव बैंक ब्रांच के बाहर धरना लगाकर नारेबाजी करते किसान नेता।

2018-19 के लिए कम लिमिट के फसली कर्ज के लिए स्कूल आॅफ फाइनेंस निर्धारित

गाइडलाइन : सहकारी सभाओं के रजिस्ट्रार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार वर्ष 2018-19 के लिए कम लिमिट के फसली कर्ज बारे स्कूल आफ फाइनेंस निर्धारित किया गया है। इसके तहत ए कंपोनेंट में फसल को उगाने के लिए होने वाला कर्ज नकद दिया जाता है तो बी कंपोनेंट में खाद, बीज, डीजल आदि के लिए कर्ज दिया जाता है। धान की फसल के लिए 15 हजार नकद व 9 हजार का सामान, नरमे के लिए 14 हजार नकद व 10 हजार का सामान, आलू के लिए 30 हजार नकद व 15 हजार, गन्ने के लिए 26 हजार नकद के साथ 10 हजार रुपए सामान के लिए रखे गए हैं।

बठिंडा की दाना मंडी स्थित कोऑपरेटिव बैंक की ब्रांच के बाहर धरना लगाकर नारेबाजी करते हुए किसान नेता। -भास्कर

बठिंडा की दाना मंडी स्थित कोऑपरेटिव बैंक की ब्रांच के बाहर धरना लगाकर नारेबाजी करते हुए किसान नेता। -भास्कर

बैंक का फैसला : फसलों पर कर्ज लिमिट बढाने को लेकर कोऑपरेटिव बैंक की ओर से 17 मई को मीटिंग की गई, जिसमें बठिंडा, फूल व तलवंडी साबो की सहकारी सभाओं के सहायक रजिस्ट्रार, एमडी, जिला मैनेजर, ब्रांच मैनेजर व सहकारी सभाओं के सचिव शामिल हुए। इसमें बैंक के फंडों को ध्यान में रखते हुए बैंक ने अपनी सीसीआर 9 फीसदी मेनटेन रखने को लेकर 10 हजार रुपए प्रति एकड़ कर्ज देने का फैसला किया। अधिकारियों का तर्क है उनको होने वाली रिकवरी बहुत कम हुई है, जिसके चलते बैंक पर बोझ बढ़ेगा और वह सीआरआर को मेनटेन नहीं रख पाएगा। इस बारे में हेड आफिस को लिखकर भेज दिया है।

हेड ऑफिस भेजी है डिटेल

बैंक की ओर से अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया है। अब हेड आफिस को सारी जानकारी दे दी है। वहां से जो आदेश आएंगे उनको वैसे लागू कर दिया जाएगा। हम पहले ही करीब 3 हजार किसानों को 14-14 हजार रुपए कर्ज दे चुकें है। मगर अब बैंक ने 10 हजार रुपए देने का फैसला लिया गया है, जिस पर भी किसान लोन लेने का तैयार हैं। उनको कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। -गीतिका मनी, जिला मैनेजर, कोऑपरेटिव बैंक।

ऐसे बढ़ता गया कर्ज

किसानों को जो फसली कर्ज दिया जाता है, उसके बदले में सहकारी बैंक को नाबार्ड द्वारा 40 फीसदी रि-फाइनांस किया जाता है। इसके चलते नाबार्ड द्वारा 2014-15 में 338.14 करोड़ रुपए की लिमिट दी गई, जो 2015-16 में 282.51 करोड़ कर दी गई। इसी प्रकार 2016-17 व 2047-18 के लिए यह 234.38 करोड़ कर दी। वहीं बैंकों की ओर से दिए जाने वाले कर्ज के तहत वर्ष 2014-15 के दौरान 384.17 करोड़ के कर्ज दिए गए तो वर्ष 2017-18 के दौरान यह कर्ज 429.07 करोड़ के दिए गए।

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