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19 साल पहले मरम्मत के लिए दिए ट्रांसफार्मरों की आज तक वापसी नहीं

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में 2014 से लेकर 2017 तक पंजाब राज्य बिजली निगम ने विभिन्न स्थानों पर खराब हुए 91 हजार 995 के करीब बिजली ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का काम किया। इसमें करीब 292 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसमें स्थिति यह रही कि बिजली निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जहां 40.70 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष व करीब 15 करोड़ नियम कायदों को ताक पर रख अप्रत्यक्ष तौर पर घपला कर दिया गया। हालत यह हुए कि बिजली निगम ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए न तो उनकी जांच करवाई और न ही उन्हें ब्लैक लिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की।

इसमें कैग की जांच से पहले साल 1999 से 2014 तक मरम्मत के लिए दो करोड़ 27 लाख की कीमत के 635 ट्रांसफार्मर लिए गए थे, आज तक निगम को ठेकेदारों ने वापस नहीं किए हैं। 19 साल के लंबे अंतराल तक किसी ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने पर कैग ने बिजली निगम के अधिकारियों की जहां फटकार लगाई है व इसमें कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश भी की है।

जिन कंपनियों को काम दिया उनके पास लाइसेंस नहीं

बिजली निगम ने ठेकेदारों को दिया 55 करोड़ से अधिक का फायदा

अफसरों की लापरवाही से 40.7 करोड़ का प्रत्यक्ष और 15 करोड़ का अप्रत्यक्ष घपला

निगम वर्कशाॅप से महंगा प्राइवेट कंपनी से काम 16 हजार 823 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत बिजली निगम की वर्कशाप में, वहीं 75 हजार 172 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत प्राइवेट ठेकेदारों से करवाई गई। 2017 में समीक्षा की गई तो इसमें ठेकेदारों ने करीब 40.7 करोड़ रुपए की चपत बिजली निगम के खातों में लगाई गई।

खुलासा| इस मामले में बिजली निगम अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने माना कि जून 2017 में 17 फर्म के खिलाफ पुलिस के पास केस दर्ज करवाए गए व कई कंपनियां के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया चल रही है। कैग के पंजाब लेखा अधिकारी जगबंस सिंह व भारत के लेखा निरीक्षक राजीव महर्षि ने रिपोर्ट के संबंध में खुलासा किया कि ट्रांसफार्मर का ठेका जारी करने से लेकर करवाए गए काम में अनियमितता की गई है। जांच रिपोर्ट में खुलासा कर बिजली निगम के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई जो काफी गंभीर है। इसमें जो जबाव निगम के अधिकारियों ने दिया है व संतोषजनक नहीं है।

बठिंडा शहर के लिए 28 करोड़ का पावर प्रोजेक्ट

शहर में मौजूदा समय में पावरकॉम के 1.10 लाख उपभोक्ता हैं। अक्टूबर 2013 में ओवरलोड बिजली सिस्टम को दुरुस्त कर बिना रुकावट बिजली सप्लाई देने के इरादे से बठिंडा शहर के लिए 28 करोड़ का पावर प्रोजेक्ट तैयार किया। पहले तो पावरकॉम ने इस प्रोजेक्ट के बजट में कटौती कर 47 करोड़ की बजाए 28 करोड़ कर दी थी। इसके बाद अक्टूबर 2013 से वर्क आर्डर जारी किया गया था। कैग के बाद पावरकॉम के आॅडिट के दौरान भी ऑडिट अफसरों ने कंपनी की तरफ से की गई इस देरी पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी।

यह तमाम कंपनियां वह हैं जिन्हें नियमानुसार ट्रांसफार्मर का काम दिया ही नहीं जा सकता है व उक्त कंपनियां व्यवसायिक भी नहीं है व उनके पास इस बारे में कोई लाइसेंस ही नहीं है। 418 ट्रांसफार्मर ऐसी कंपनियाें के पास थे जो पहले कमर्शियल दिखाई गई लेकिन बाद में इस वर्ग से बाहर हो गई व वर्तमान में इनके पास दो करोड़ 38 लाख का सामान पड़ा है।

ट्रांसफार्मर वापस ही नहीं लौटाए : निगम ने जितने ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए भेजे उसमें दो हजार 238 की वापसी ही नहीं की गई। इसमें 13 करोड़ 43 का नुकसान उठाना पड़ा। 551 ट्रांसफार्मर तय गारंटी पीरियड से पहले खराब हो गए। इसमें बिजली निगम को 3.14 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा। ।

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