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हमें अपने जीवन की डोर पूर्ण सतगुरु के हाथों में सौंप देनी चाहिए : परमजीत

3 वर्ष पहले
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए साध्वी परमजीत भारती ने कहा कि आज का मानव अपनी भारतीय संस्कृति और सभ्यता को भूलता जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति ने चाहे अपने जीवन की रफ्तार को भले ही बहुत तेज कर लिया हो पर आगे बढ़ने की दौड़ में वह अपने नैतिक मूल्यों को पीछे छोड़ता जा रहा है। इंसान आज के युग में यह भूल चुका है कि नींव के बिना हम मंजिल या इमारत को खड़ा नहीं कर सकते, इसी प्रकार अगर नींव ही कच्ची है तो भी हम इमारत को पक्का और मजबूती नहीं दे सकते।

यही बात हमारे धार्मिक, वेद, शास्त्र समझा रहे हैं कि हे मानव शुरुआत में ही अपनी नींव को मजबूत रखा भाव यह कि अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ जा तभी आगे जाकर हम अपने जीवन की सफलता को प्राप्त कर सकते हैं। यह भी विडंबना है कि इसका सही मार्ग हमें कौन दिखा सकता है? यह प्रश्न का उत्तर आज प्रत्येक व्यक्ति ढूंढ रहा है पर जब हम भारतीय शास्त्रों, वेदों और ग्रंथों की ओर बढ़ेंगे तो हमें पता चलेगा कि यह रास्ता हमारे जीवन में केवल मात्र एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु ही दिखा सकते हैं। वह हमारे धार्मिक शास्त्रों के अनुसार हमें परमात्मा का साक्षात्कार करवाते हैं। वहीं से शुरू हो जाता है हमारे जीवन का सफर, जहां चलते-चलते हमें एक के बाद एक सब कुछ ज्ञान होता है। अंत में फिर उस व्यक्ति की नींव पक्की और मजबूत हो जाती है और वह फिर चाहे कितना भी आगे क्यों न दौड़ ले, पर वास्तव में वह अपनी सभ्यता और संस्कृति के साथ जुड़ा रहता है। इसलिए हमें अपने जीवन की डोर एक पूर्ण सतगुरु के हाथों में सौंप देना चाहिए।

प्रवचन में साध्वी ने संस्कृति और सभ्यता से जुड़ने के लिए किया प्रेरित

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में आयोजित साप्ताहिक सत्संग का अानंद लेते श्रद्धालु। (इनसेट में) साध्वी परमजीत भारती।

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