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छात्रों के दोस्त बनें अध्यापक, उन्हें कूल रहना सिखाएं : बस्सी

3 वर्ष पहले
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डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग ने टीचर्स होम में एक दिवसीय किशोर शिक्षा संबंधी एडवोकेसी वर्कशाप करवाई। डीईओ सेकेंडरी मनिंदर कौर की अगुवाई व जिला साइंस सुपरवाइजर बलजीत कौर की देखरेख में जिले के 50 स्कूलों के स्कूल मुखिया और नोडल अफसर अध्यापकों ने शिरकत की।

रिसोर्स पर्सन डॉ. जतिंदर सहगल ने 10 से 19 साल तक की उम्र किशोर विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक व सामाजिक समस्याओं तथा उनमें सकारात्मक बदलाव लाने पर चर्चा की। संजीव नागपाल ने किशोर के व्यवहार पर चर्चा करते हुए उन्हें समाज के सेहतमंद व जिम्मेदार नागरिक बनाने के तरीके बताए।

यूएनओ के एड्स एजुकेटर नरिंदर बस्सी ने कहा कि परिवार यानी खानदान का बच्चों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। किशोर उम्र में शारीरिक व मानसिक बदलाव को सांझा करने में अकसर झिझक रहती है। विद्यार्थियों से अध्यापक दोस्ती बनाएं और उनकी प्राब्लम को समझते हुए उनका निदान करें। अध्यापक बच्चों को कूल रहना, मीठी वाणी बोलने के साथ-साथ रिगार्ड और रेस्पेक्ट करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने किशोर को सभ्य, संस्कारवान तथा उच्च चरित्र वाला बनाने के लिए अध्यापकों को अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सर्वे के अनुसार एड्स से प्रभावित व्यक्तियों में 44 प्रतिशत की उम्र 15 से 25 साल है।

प्रिंसिपल हरदीप सिंह तग्गड़ ने कहा कि इस उम्र के विद्यार्थियों को उनके अच्छे काम के लिए हौसला अफजाई की जाए। मंच संचालन बलविंदर बाघा ने किया। प्रोग्राम में लखवीर सिंह, हरवीर सिंह व हरजीत सिंह, शेर सिंह व रमन कुमार का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम

वर्कशाप में स्कूल मुखी व नोडल अफसरों से विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक बदलाव के प्रति सचेत रहने का आह्वान

टीचर्स होम में लगाई किशोर शिक्षा एडवोकेसी वर्कशाप में उपस्थित स्कूल मुखी व नोडल अफसर

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