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7 दिन में घर व दुकानों से एेड न उतारी तो होगा 50 हजार जुर्माना

3 वर्ष पहले
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अगर आपकी बिल्डिंग या छत पर किसी भी प्रकार का अवैध विज्ञापन लगा है तो उसे 7 दिनों में उतार लें, वरना यह कोर्ट का चक्कर लगवा सकता है। इतना ही नहीं 50 हजार रुपए तक जुर्माना भी हो सकता है, जिसका भुगतना भी सीजेएम की कोर्ट में होगा।

नगर निगम बठिंडा ने नई एडवरटाइजमेंट पॉलिसी 2018 को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत निगम कमिश्नर ने एडवरटाइजमेंट के नोडल अधिकारी व तहबाजारी के सुपरिंटेंडेंट को शहर में लगी इल्लीगल एडवरटाइजमेंट की सूची तैयार कर उनके खिलाफएक्शन लेने के आदेश दिए हैं। वहीं शहर के किस एरिया में किस प्रकार की इल्लीगल एडवरटाइजमेंट लगी हुई है, इसकी रिपोर्ट भी कमिश्नर ने तलब की और हिदायत दी है कि नोटिस जारी कर उन्हें रिमूव करवाएं, नहीं करने पर उनका चालान कर कोर्ट में भेजने के लिए कहा गया है। बता दें कि पॉलिसी नोटिफाई होने के बाद निगम कमिश्नर को दो महीने में इसे पूरी तरह लागू कर सरकार को रिपोर्ट भेजनी है।

कार्रवाई

जुर्माने का भुगतान निगम के पास नहीं बल्कि करना पड़ेगा जिला अदालत के पास

निगम पब्लिक नोटिस जारी कर दिया 7 दिन का समय

निगम ने पब्लिक नोटिस जारी कर शहरवासियों को सूचित किया है निगम एरिया में आते इंस्टीट्यूट, दुकान, मकान, बूथ, जमीन, शोरूम, दीवार, व्हीकल पर निगम की मंजूरी से बिना एडवरटाइजमेंट की गई है, तो वह सात दिन के भीतर उतर ले। चूकिं सरकार ने 21 मार्च को पंजाब आउटडोर एडवरटाइजमेंट पालिसी 2018 नोटिफाई की है, जिसे लागू करते हुए निगम की तरफ से इसकी सख्ती से पालना की जाएगी। अगर नहीं उतराने पर म्यूनिसिपल एक्ट 1976 की धारा 126 अधीन बनती कार्रवाई की जाएगी। दुकानदार, बूथ, एससीओ, एससी एफ और संस्था की तरफ अपनी बिल्डिंग पर केवल अपनी फार्म का नाम की विज्ञापन कर सकता है। इसके अलावा अन्य कंपनी की एडवरटाइजमेंट की तो, वह गैर कानूनी मानी जाएगी।

सबूत के तौर पर होगी फोटोग्राफी

पहले चरण में निगम ने शहर की दीवारों पर बॉल पेटिंग कर एडवरटाइजमेंट करने वाले प्राइवेट इंस्टीट्यूट, स्कूल, कालेज, अस्पताल व अन्य संस्थाओं की पहचान कर सूची तैयार कर रहा है। इसके अलावा सबूत के तौर फोटोग्राफी भी की जा रही है, ताकि दूसरा पक्ष निगम को कोर्ट में झूठा साबित न कर सके। निगम ने शहर के प्रमुख सड़कों की दीवारों पर बनी बॉल पेटिंग, पोस्टर व बैनरों की फोटोग्राफी कर उन संस्थानों को नोटिस जारी कर रहा है, जिन्होंने निगम की बिना परमिशन के यह एडवरटाइजमेंट करवा रहे हैं।

इन बातों से रहंे सतर्क

शहर में रिहायशी व कॉमर्शियल बिल्डिंगों में सबसे ज्यादा एडवरटाइजमेंट की जा रही है। नई पॉलिसी में इसे बैन कर दिया गया है। अब बिना नोटिस के निगम सीधे चालान काट रिमूव कर देगा। बिल्डिंग को कोई नुकसान होता है तो निगम से वो क्लेम भी नहीं कर सकेगा। पॉलिसी लागू होने के बाद किसी भी बिल्डिंग में एडवरटाइजमेंट लगी मिलती है तो उनका म्यूनिसिपल कार्पोरेशन एक्ट के सेक्शन 126 के तहत चालान होगा जिसका जुर्माना कोर्ट में जाकर भरना पड़ता है। जिसमें 50 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

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