भगवान का नाम जैसे भी ले लो, काम बन जाएगा : भुवनेश्वरी जी
ग्रीन सिटी में स्थित श्री कृपालु कुंज आश्रम में आयोजित 8 दिवसीय श्रीमद्भागवत भक्ति प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं के साथ नृत्य करतींं कथावाचक भुवनेश्वरी जी।(बाएं) भुवनेश्वरी जी को सम्मानित करते हुए श्रद्धालु। (दाएं)
भास्कर संवाददाता|बठिंडा
ग्रीन सिटी में स्थित कृपालु पदमा ट्रस्ट, श्री कृपालु कुंज आश्रम में कृपालु महाराज की प्रचारिका बृज भुवनेश्वरी देवी ने 8 दिवसीय श्रीमद्भागवत भक्ति प्रवचन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को बताया कि संसार का त्याग कर मन भगवान में लगाओ। अपना अंत:करण शुद्ध करो। भगवान की भक्ति करो।
उन्होंने कहा कि भक्ति तो भगवान के अंग हैं। यह शरीर निरंतर प्रय| करता है कि आत्मा को सुख मिले। आत्मा के अंदर ही परमात्मा बैठे हैं। भक्ति शब्द का अर्थ है सेवा। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम ही जीव को इस भवसागर से पार करा सकता है और भगवान नाम जब भी, जैसे भी ले लो, काम बन जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरु और भगवान दोनों एक हंै। जैसी भक्ति आप भगवान की करते हैं, वैसी ही भक्ति गुरु की करनी है। गुरु काे भगवान का रूप मानकर साधना भक्ति करो। बिना भक्ति के भगवान नहीं मिलेगा। और भक्ति करते-करते संसार के कुसंग से जरूर बचना है। नहीं तो भक्ति का फल नहीं मिलेगा।
8 दिवसीय भगवत भक्ति प्रवचन के अंतिम दिन डाॅक्टर अतिन गुप्ता, वीनू, भूषण, राम अवतार शर्मा, देवराज, रजिंदर ढिल्लो मुख्य मेहमान के तौर पर उपस्थित हुए और ज्योति प्रज्जवलित किए और कथावाचक भुवनेश्वरी जी को फूल माला भेंट किए।
इस मौके पर ग्रीन सिटी वेलफेयर सोसायटी फेस वन प्रेसिडेंट ओमप्रकाश शर्मा, रोशन लाल, योगिंदर मोहन, प्रवीन गोयल, विनोद सिंगला, अमित वधवा, इंद्रमोहन, अरविंद अग्रवाल, पवन अरोड़ा, प्रदीप सिंगला, वीरेंद्र मोहन, दर्शन गर्ग, डीपी गोयल, गुरदास गर्ग, प्रदीप बांसल, डॉ. कस्तूरी लाल, विजय वर्मा, रॉकी, अमृत पाल उपस्थित थे। अंत में कृपालु पदमा ट्रस्ट के प्रधान दर्शन गर्ग और पीडी गोयल ने कथावाचक भुवनेश्वरी जी का धन्यवाद किया जिन्होंने हम जीवों को भक्ति का मार्ग बताया व ट्रस्ट के सभी मेंबरों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया। जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।
श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।