श्रीमद्भागवत के श्रवण से श्रीमन नारायण हृदय में हो जाते हंै विराजमान : ध्रुव कृष्ण
बल्ला राम नगर में स्थित संत शिरोमणि श्री बाला जी मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर भगवान श्री परशुराम जयंती एवं श्री हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा वाचक श्रद्धेय श्री ध्रुव कृष्ण महाराज वृंदावन वालों ने सत्संग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि बिना सत्संग के ज्ञान नहीं हो सकता तथा इसके बिना भगवान की इंसान पर कृपा नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि श्रीमदभागवत कथा के श्रवण मात्र से ही श्री मन नारायण भगवान हृदय में विराजमान हो जाते है तथा जिससे अज्ञान रूपी अंधकार मे भटक रहे मानव को ज्ञान रूपी ज्योति की लौ में सद मार्ग मिल जाता है। इसके श्रवण से अंधकार में भटके हुए व्यक्ति एवं प्रेत योनियों में गए हुए व्यक्ति मुक्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा सत्संग में आने से व्यक्ति के पाप मिट जाते है उसमें सकारात्मक उर्जा का संचार होता है मन में दूसरे के प्रति श्रद्धा का भाव पैदा होता है तथा व्यक्ति को संसार में आने के उद्देश्य का ज्ञान होता है। उन्होंने कहा कि धर्म जगत में जितने भी योग यज्ञ, अनुष्ठान एवं तप किए जाते हैं, उन सब का एक ही मंतव्य होता है कि भगवान में हमारी भक्ति लगी रहे। श्री भागवत के प्रारंभ में ही सत्य की वंदना की गई है क्योंकि सत्य सर्वत्र एवं व्यापक होता है। सत्य की चाह प्रत्येक को होती है। चाहे वह पिता अथवा पुत्र ही क्यों न हो। पिता अपने पुत्र से सत्य बोलने की अपेक्षा रखता है। यहीं नहीं चोर भी दूसरे चोर से परस्पर सत्य रखने की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत में निष्कपट धर्म का वर्णन किया गया है। जो व्यक्ति निष्कपट हो उसे ही कथा कहने सुनने का अधिकार है। इस मौके मंदिर संस्थापक संदीप शर्मा, चेयरमैन नत्थू राम शर्मा, नरिंदर सिंह चौहान, युधिष्ठिर मलहोत्रा, हर्ष, दीपक, प्रवीन, अमृत लाल सिंगला, सुरिंदर, नरेश मित्तल, मुलखराज, अवध तिवारी के अलावा अन्य लोग उपस्थित थे।
बल्लाराम नगर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते ध्रुव कृष्ण महाराज।