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रिहायशी इलाके में बंदर ने मचाया उत्पात, 8 बच्चों को काटा, विभाग की पकड़ से बाहर

3 वर्ष पहले
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शहरी इलाके में कई दिनों से घूम रहे एक बंदर ने बहुत उत्पात मचाया हुआ है, लाइनपार के रिहायशी इलाकों में घुसा बंदर घरों में घुसकर अब तक 8-10 बच्चों को घायल कर चुका है। वन विभाग और चिड़िया घर प्रबंधन को बंदर के आतंक से अवगत करवाने के बावजूद अभी तक उसे काबू नहीं किया गया जिससे लोग अपने घर में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

फॉरेस्ट विभाग की टीम बंदर को पकड़ने में बेबस है, विभिन्न इलाकों से आई शिकायतों के आधार पर पिंजरे भी रखवाए गए लेकिन इसकी भनक पाकर सतर्क हुआ बंदर पिंजरे में नहीं आ रहा। खुंखार और उत्पाती जानवरों को काबू करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन का इस्तेमाल करना होता है लेकिन वन विभाग के पास ट्रेंकुलाइजर गन नहीं है। ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों के लिए बंदर पकड़ना मुश्किल है। प्रताप नगर गली नंबर 17 स्थित डिफरेंट कॉन्वेंट स्कूल में कई दिनों से आ रहे बंदर के उत्पात से बच्चे और स्कूल स्टाफ दहशत में हैं। इसी डर के चलते बच्चों की क्लासें शिफ्ट करनी पड़ी। बंदर के उत्पाद के बारे में बाकायदा जिला प्रशासन के अलावा फॉरेस्ट विभाग, चिड़िया घर को भी आगाह किया गया। वन विभाग की ओर से स्कूल में पिंजरा लगाकर केले का गुच्छा लटकाया गया है लेकिन बंदर पिंजरे के पास नहीं आ रहा है। वीरवार को बंदर प्रताप नगर गली नंबर 5 के प्ले वे स्कूल में घुस गया और सीढ़ियों में जा बैठा। स्कूल की संचालिका के चिल्लाने पर मोहल्ला निवासियों ने डंडों का डरावा देकर बंदर को खदेड़ा। उत्पाती बंदर पिछले कई दिनों से रेलवे कॉलोनी, लाल सिंह बस्ती, प्रताप नगर, साहिबजादा अजीत सिंह नगर आदि रिहायशी इलाकों में घूम रहा है। वीरवार को प्रताप नगर गली नंबर 17 के 6 साल के बच्चे नमन को अपने नुकीले पंजों से घायल कर दिया जबकि शुक्रवार को साहिबजादा अजीत सिंह नगर के बच्चे हैजल को जख्मी किया। सुपरिटेंडेंट इकबाल सिंह के घर में काम करने वाली एक महिला को भी बंदर ने काट खाया। बून पब्लिक स्कूल में घुसे बंदर ने वहां के शीशे भी तोड़ दिए।

प्रताप नगर के डिफरेंट कॉन्वेंट स्कूल की चारदीवारी पर बैठा बंदर। पकड़ने के लिए कवर करके रखा गया पिंजरा।

पटाखे छोड़कर बंदरों को भगाना चाहिए : डीएफओ
वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने अलग-अलग जगहों पर पिंजरे भी लगा रखे हैं। विभाग को ट्रेंकुलाइजर गन के लिए लिखा गया है, वहीं एनिमल हसबेंडरी टीम को भी सहयोग का आग्रह किया गया है ताकि बंदरों को काबू किया जा सके। पकड़े गए बंदरों के कानों में रिंग डाले हुए हैं जिससे प्रतीत होता है कि ये पालतू बंदर हैं जोकि इंसानों के बीच रहना पसंद करते हैं। बंदर को देखकर घबराने की बजाए आगे पटाखे छोड़ देने से बंदर भाग जाते हैं।

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