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सेमेस्टर प्रणाली में रिवीजन संभव नहीं : ईशा

3 वर्ष पहले
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एसएसडी कॉलेज आॅफ प्रोफेशनल स्टडीज भोखड़ा के कॉमर्स विभाग की ओर से लगाया पांच दिवसीय प्रदेशस्तरीय सेमिनार का शुक्रवार को समापन हुआ। सेमिनार में जीएसटी, ई-कॉमर्स एप्लीकेशन व फ्यूचर कैरियर प्रॉस्पेक्ट्स विषय पर वर्कशाप लगाई गई। वहीं बीकॉम एमकॉम के विद्यार्थियों को अलग-अलग कैरियर तथा नौकरी के अवसर के बारे में जानकारी दी। विषय विशेषज्ञों ने जीएसटी, एकाउंट्स, टेली समेत अन्य कई पहलुओं पर विचार साझा किए। विद्यार्थियों की क्विज व वाद-विवाद मुकाबले भी कराए गए।

प्रो. काजल बजाज ने भारत में जीएसटी की दिक्कतों के बारे में व्याख्यान देते बताया कि टैक्स सुधार तथा इसमें शामिल समस्याओं के अनुभव को यथार्थ स्तर पर रखना चाहिए। जीएसटी पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल के शुरू होने के बाद 10 लाख करोड़ से ज्यादा राशि का व्यापार हुआ है। प्रो. लगिमा शर्मा ने भारत में ई-कॉमर्स की चुनौतियां, पिछले साल के खर्च तथा भविष्य में खर्च के बढ़ने की संभावना के बारे में बताया। प्रो. ईशा शर्मा ने सेमेस्टर सिस्टम की प्रणाली शिक्षा के विषय को उजागर किया। उन्होंने यूजीसी द्वारा दी हिदायतों की जानकारी देते कहा कि भारत की यूनिवर्सिटियों द्वारा सेमेस्टर प्रणाली को स्वीकार किया गया है। सिलेबस को सिखाने तथा इसे पूरा करने के लिए समय की कमी है, काम के अतिरिक्त बोझ के कारण दोहराई नहीं होती जिससे विद्यार्थियों में अकादमिक गुणों के नतीजे कम मिलते हैं। क्विज मुकाबले में तरुण, रजत, अंकिता व प्रियंका की टीम ने पहला स्थान जबकि वाद-विवाद में हर्ष बांसल व साहिल कुमार पहले स्थान पर रहे। प्रिंसिपल डॉ. राजेश सिंगला ने कहा कि कारपोरेट सेक्टर में नौकरी के अनेक अवसर मिल रहे हों लेकिन इनमें कंपीटिशन बेहद टफ हो गया है। उन्होंने विजेता विद्यार्थियों को इनाम बांटे।

सेमिनार में विद्यार्थियों ने जीएसटी, ई-कॉमर्स एप्लीकेशन की बारीकियां समझीं
एसएसडी कॉलेज के सेमिनार को संबोधित करते एक्सपर्ट।

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