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5 थानों और 3 चौकियों में 450 कर्मी, 15 पेट्रोलिंग फिर भी 2 माह में 25 स्नैचिंग

3 वर्ष पहले
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साढ़े तीन लाख की आबादी वाले शहर में 5 थानों और 3 चौकियों में करीब 450 कर्मचारी तैनात है। वहीं 15 मोटरसाइकल सवार पेट्रोलिंग, 7 कार और महिला सुरक्षा को लेकर वूमन आर्मंड स्पेशल प्रोटेक्शन स्क्वॉयड की 9 स्कूटी भी शहर में तैनात की गई है। फिर भी झपटमार पुलिस के तमाम बंदोबस्त को ठेंगा दिखा महिलाओं और राह जाते लोगों को शिकार बना रहे हैं। अप्रैल और मई में बाइक सवार झपटमार 25 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। परसराम नगर चौक से सीसीटीवी कैमरे गायब है।

इसी क्षेत्र में 2 माह में 3 झपटमारी की वारदातें हो चुकी हैं। पुलिस की तरफ से शहर में हर पेट्रोलिंग पार्टी के लिए एक मोबाइल पिकट बना रखी है। झपटमारी की घटनाओं के बढ़ने के बाद इन 15 पोस्टों में हर समय पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि घटना के बाद पुलिस कर्मी जांच करने में 15 से 30 मिनट का समय लगाते हैं तब तक झपटमार वहां से निल चुके होते हैं।

पुलिस का दावा- अब तक पकड़े गए अपराधियों ने माना नशा या महंगे शौक पूरे करने के लिए करते हैं वारदातें

आखिर क्यों पकड़ में नहीं आ रहे झपटमार

पुलिस की माने तो इस धंधे में दो तरह के नौजवान शामिल है एक प्रोफेशनल है जो घटना को अंजाम देते हैं, वहीं कई नौजवान नशे की पूर्ति या फिर महंगे शोक पूरे करने के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। यह झपटमार वाहनों में जाली नंबर लगाते हैं व वाहनों को भी बार-बार तबदील करते हैं। वही एक स्थान पर घटना को अंजाम देने के बाद वह उसी जगह पर 15 दिन तक नहीं आते हैं। इस तरह की जालसाजी के चलते पुलिस उन तक पहुंचने में नाकाम रहती है। दूसरी तरफ पुलिस के पास झपटमारों, लूटपाट करने वालों और चोरों की कारगुजारी पर नजर रखने के लिए किसी तरह का खुफिया तंत्र नहीं है। प्राइवेट एजेंटों का जाल भी काफी कमजोर हैं जो कई बार अपराधियों के साथ ही गठजोड़ कर लेते हैं।

ज्यादातर सोने की चीजें ही झपटते हैं

आम तौर पर झपटमार सोने की चैनी या फिर मोबाइल झपटने का काम ज्यादा करते हैं। सोने के सामान को आसानी से कुछ ऐसे ज्वैलरों के पास सस्ते दाम में बेचना आसान होता है जो इस तरह के जालसाजों के दम पर ही अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। वहीं सामान का बिल नहीं होने का नुकसान भी लोगों को होता है, इसमें पुलिस की बरामदगी के बाद वापस हासिल करना संभव नहीं होता है।

तुरंत मौके पर पहुंचती है पुलिस

जैसे से ही पुलिस को किसी स्नेचिंग या अन्य किसी वारदात की सूचना मिलती है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचती है और मामले में कार्रवाई शुरू कर देती है। ऐसा नहीं है कि पुलिस काम नहीं कर रही है। पीसीआर की टीमें चौबीस घंटे अलर्ट हैं। झपटमारों को पकड़ने के लिए पुलिस लगी है। गुरमीत सिंह, एसपी सिटी।

महिलाओं में गुस्से के साथ डर का माहौल

महिलाएं अब घर में भी सेफ नहीं

प्रताप नगर की नेहा वर्मा का कहना था कि वह हर चौथे दिन बालियां और सोने की चेन झपटने की खबरें पढ़ती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अब महिलाएं घर में भी सुरक्षित नहीं हैं।

पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए |अध्यापिका ममता ने कहा कि शहर के बाजारों और गली मोहल्लों में पीसीआर की टीमें गश्त करें ताकि झपटमार अपने इरादों में कामयाब न हो सके। मेरी सहेली की दादी से झपटमार पता पूछने के बहाने बालियां छीनकर ले गए थे। पुलिस वारदातों को अंजाम देने वाले लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दें।

आर्टिफिशयल गहने पहनती हूं |परस राम नगर अंजू गर्ग का कहना था कि जबसे परस राम नगर चौक पर एक महिला के गले से सोने की झपटने की घटना हुई है। उसके बाद से उसने आर्टिफिशयल गहने पहनने शुरू कर दिए हैं। एसएसपी से यही कहूंगी कि झपटमारी रोकने के लिए बाजारों और मोहल्लों में पीसीआर की गश्त बढ़ाई जाए।

अकेली जाने में लगता है डर

रीना जोड़ा कहती है कि वह जब भी घर से निकलती हैं तो किसी न किसी रिश्तेदार या सहेली को साथ रखती हैं। पता नहीं झपटमार किस रूप में आकर छीना झपटी कर भाग जाए।

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