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खसखस की खेती से पंजाब होगा खुशहाल थमेगा सिंथेटिक ड्रग का सिलसिला : गांधी

3 वर्ष पहले
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आम आदमी पार्टी के सांसद धर्मवीर गांधी का दावा है कि पंजाब में खसखस की खेती होने पर किसान खुशहाल होगा, वहीं जानलेवा सिंथेटिक मेडिकल नशे के सेवन पर भी रोक लगने से युवा मौतों का सिलसिला थमेगा। अपने इसी तर्क के साथ लोकसभा में बिल भी पेश किया है जिसे मंजूर कर लिया गया है और आगामी दिनों में इस पर बहस होनी है।

सांसद गांधी शनिवार को बठिंडा में उन्नत किसान वेलफेयर सोसायटी की बैठक के दौरान बठिंडा पहुंचे। प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने राजस्थान व मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि ट्रायल के तौर पर पंजाब में निर्धारित जमीन में खसखस की खेती की जाए, उससे हासिल अनुभव बाद सरकार अपनी निगरानी में खसखस की खेती का कंट्रोल करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कारोबार करे तो पंजाब का किसान आर्थिक तौर पर मजबूत होगा जिसे किसान खुदकुशी भी खत्म होगी।

उन्नत किसान वेलफेयर सोसायटी की बैठक में राजस्थान व एमपी की खेती को सराहा

सालों से पोस्त-अफीम का इस्तेमाल : धर्मवीर

सांसद गांधी के अनुसार पंजाब में अफीम-पोस्त आदि रिवायती नशे हैं और हजारों साल से पंजाब में इसका निश्चित मात्रा में इस्तेमाल होता रहा है। यही नहीं, छोटे-बड़े नेता खुद भी पारंपरिक खुराक के तौर पर अफीम-पोस्त खाते हैं जिससे उनकी कार्य करने की क्षमता में इजाफा होता है। उन्होंने कहा कि अफीम, पोस्त व भांग आदि पर पाबंदी लगा दी और ड्रग माफिया ने चिट्टा, स्मैक, हेरोइन व मेडिकल नशे घर-घर पहुंचा दिया। इस जानलेवा नशे की बदौलत ही पंजाब मौत का कुआं बन गया। उन्होंने कहा कि जब तक पंजाब में अफीम-पोस्त का इस्तेमाल होता था, कभी ऐसी मौतों की खबर नहीं आई। सिंथेटिक व मेडिकल ड्रग माफिया खत्म करने के लिए पंजाब में खसखस की खेती को मंजूरी दी जाए जिससे कि पंजाब के लोगों को सस्ते दामों में रिवायती नशा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा जबकि किसान के सिर चढ़ा कर्ज भी उतरेगा।

पंजाब में पानी बचाने पर भी दिया जाेर

उन्नत किसान वेलफेयर सोसायटी की ओर से पंजाब में खसखस की खेती के लिए चलाई विशेष मुहिम के तहत बठिंडा में मालवा बैल्ट का सेमिनार लगाया गया। इसमें खसखस की खेती को उत्साहित करने वाले किसानों कृषि वैज्ञानिकों तथा वातावरण माहिरों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। सोसायटी के प्रधान हरजिंदर सिंह घुम्मन, उप प्रधान जैलदार जगदीप सिंह, कमेटी मेंबर दलजीत सिंह सिधू ने कहा कि पंजाब में खेती के रवायती चक्कर में पंजाब की धरती 2030 तक मरुस्थल के हालातों में बदल जाएगी। इसके अतिरिक्त पांच दरियाओं की धरती पर लोगों को पीने के लिए पानी के लिए भी तरसना पड़ेगा।

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