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सिकंदर सिंह की निगरानी में रिश्वत की डील कैदी पवन करता था, गौरव के अकाउंट में मंगाते थे पैसे

3 वर्ष पहले
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जेल में सुविधा मुहैया कराने के बदले लेता था मोटी रिश्वत, कैदी के भाई की शिकायत पर की थी विजिलेंस ने कार्रवाई

भास्कर संवाददाता| मानसा

जिला जेल में बंद कैदियों को एशो आराम की सुविधाएं मुहैया करवाने के बदले रिश्वत लेने के आरोप में भगोड़ा चल रहे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ ने शनिवार को मानसा कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। गुरजीत सिंह की आज सुनवाई होनी थी। इसी मामले में विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा रेंज ने वीरवार को जेल सुपरिंटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा को उस समय गिरफ्तार किया जब वह ऑन ड्यूटी जेल में थे। विजिलेंस की टीम ने जेल सुपरिंटेंडेंट की कोठी में भी सर्च किया।

एसपी विजिलेंस भूपिंदर सिंह सिद्घू ने बताया कि डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह जेल में बंद कैदियों से उनकी मनमर्जी के मुताबिक साथियों के साथ बैरकों में रखने, जेल में मोबाइल व अन्य सुविधाएं देने के बदले कैदियों के परिजनों से 10 हजार रुपए से लेकर 25 हजार मंथली की होती थी डील। यह काम वह अपने सहायक सुपरिटेंडेंट सिकंदर सिंह की निगरानी में कैंटीन पर काम करते कैदी पवन कुमार की देख-रेख में किया जाता था। भरोसे वाले कैदियों के एकाउंट में भी मगाए जाते थे पैसे।

भगोड़ा चल रहे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत बराड़ ने किया कोर्ट में सरेंडर

सुपरिंटेंडेंट दविंदर रंधावा को पुलिस ने 17 मई को ही कर लिया था अरेस्ट

एक कैदी को सुविधा देने के लिए मंथली Rs.10 से 25 हजार की होती थी डील

कैदियों को मोबाइल फोन से लेकर नशे तक की देता था डिलीवरी

एसपी सिद्धू ने बताया कि मुकदमें की जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों व आरोपी कैदी पवन कुमार से की पूछताछ के आधार पर जिला जेल सुपरिटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़, सहायक सुपरिंटेंडेंट सिकंदर सिंह की ओर से जेल में बंद कैदियों, हवालातियों को उनके मनमर्जी के साथियों के साथ बंद रखने, मोबाइल फोन, हीटर, गद्दे आदि सुविधाएं देने, नशे का प्रयोग करने की छूट देने और ड्यूटी में बिना दर्ज किए मुलाकात की सुविधा देकर रिश्वत हासिल करने के खुलासे हुए थे। उन्होंने बताया कि कैदी पवन कुमार से रेड के दौरान पकड़े गए मोबाइल फोन की जेल में इस्तेमाल किए जाने व जेल अधिकारियों के साथ इस फोन से बातचीत होने के भी खुलासे हुए हैं।

कैदी गौरव के भाई की शिकायत पर कार्रवाई

एसपी ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार रिश्वत या तो नकद ली जाती थी या फिर भरोसे वाले कैदियों के बैंक खातों में डलवाई जाती थी। उन्होंंने बताया कि शिकायतकर्ता का भाई गौरव कैदी पवन कुमार के साथ कैंटीन पर काम करता रहा है और उसके खाते में भी पवन कुमार के कहने पर कैदियों के परिजनों की ओर से रकम डलवाई गई और बाद में उसके भाई को तंग परेशान किया जाने लगा और मारपीट भी की गई है। रविंदर कुमार ने बताया कि कैदी पवन कुमार ने अपने मोबाइल से उसके साथ बातकर उसके भाई गौरव के खाते में जमा हुई रकम के बदले 86 हजार 200 रुपए के चेक और 50 हजार रुपए नकदी की मांग की गई।

पुलिस रिमांड के दौरान और खुलासे होने की संभावना

इस मुकदमे की जांच दौरान इस रिश्वत मामले में जेल सुपरिटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा मानसा की मिलीभगत होने के कारण उसे मुकदमे में नामजद कर 17 मई को उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। जिसका पुलिस रिमांड हासिल कर उससे ओर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ जो कि मुकदमा दर्ज होने से लेकर भगौड़ा चल रहा था, के खिलाफ अदालत सीजेएम मानसा में भगौड़ा घोषित करने की कार्रवाई चल रही थी। जिसकी आज सुनवाई होनी थी। उन्होंने बताया कि गुरजीत सिंह बराड़ द्वारा मानसा अदालत में पेश होने के बाद डीएसपी विजिलेंस मनजीत सिंह सिद्धू द्वारा से गिरफ्तार कर उसका पुलिस रिमांड हासिल कर उससे पूछताछ की जा रही है।

विजिलेंस टीम ने जेल सुपरिंटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा को वीरवार को कर लिया था गिरफ्तार।

सहायक सुपरिंटेंडेंट व कैदी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

जिसके बाद विजिलेंस की ओर से रविंदर कुमार के बयानों पर 17 दिसंबर को भ्रष्टाचार निरोधक समेत अन्य धाराओं के तहत जिला जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़, सहायक सुपरिंटेंडेंट सिकंदर सिंह व कैदी पवन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर 17 दिसंबर को ही सिकंदर सिंह व पवन कुमार जेल की सीमा के बाहर तामकोट भैणीबाघा लिंक रोड पर 50 हजार की रिश्वत व 86 हजार 200 रुपए के रिश्वत के चेक समेत विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा की टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए थे।

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