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सीएचसी में बैड की कमी,कर्मचारी कहते हैं ड्रिप इंजेक्शन ले जाओ, उपचार कहीं ओर करा लो

3 वर्ष पहले
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कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को सरकार ने सौ बैड का तो कागजों में घोषित कर दिया, लेकिन हकीकत में उसके अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं व संसाधन अभी तक नहीं बढ़ाए गए हैं। इससे सीएचसी पर आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप पसरा हुआ है तथा अस्पताल में मरीजों की संख्या दुगुनी हो गई है। ऐसी स्थिति में केन्द्र पर उपचार कराने के लिए भर्ती होने वाले मरीजों को पर्याप्त संख्या में बैड ही उपलब्ध नहीं हैं। हालत ये है कि दो-तीन मरीजों को एक ही बैड पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है। बैड उपलब्ध नहीं होने से नर्सिंग स्टॉफ मरीजों से यहां तक कहते नजर आते हैं वे ड्रिप-इंजेक्शन ले जाकर उपचार घर पर अथवा कहीं और करा लें अथवा बेड़ों पर पहले से उपचाराधीन मरीजों से बात कर उनके साथ एडजस्ट हो जाएं। जानकारी के अनुसार मौसमी बीमारियों का सीजन चलने से इन दिनों सीएचसी के आउटडोर में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं। वहीं रोजाना 100 से अधिक मरीजों को इनडोर वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। लेकिन सीएचसी के सामान्य वार्डों में फिलहाल 40 बैड ही उपलब्ध हैं। ऐसे में भर्ती मरीजों को उपचार के लिए मारामारी करनी पड़ती है।

बयाना. कस्बे के सीएचसी पर एक बैड पर उपचार कराते दो-दो मरीज ।

नर्सिंग स्टॉफ व मरीजों के बीच होती नोक-झोंक

बैड कम होने से आए दिन नर्सिंग स्टॉफ व मरीजों के बीच कहासुनी होती है। क्योंकि मरीज बैड की डिमांड करते हैं लेकिन नर्सिंग स्टॉफ बैड नहीं होने से सभी मरीजों को अलग से बैड उपलब्ध कराने में असमर्थ होता है। बेड़ों की कमी से नर्सिंग स्टॉफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को बैड खाली होने का इंतजार भी करना पड़ता है।

सरकार ने अस्पताल को सौ बैड का घोषित तो कर दिया है लेकिन अभी वित्तीय स्वीकृति नहीं आई है। बेड़ों की संख्या कम होने से मरीजों को परेशानी तो होती है।

डॉ. भरत मीणा, चिकित्सा प्रभारी, सीएचसी बयाना

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