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एसबीआई बैंक में अव्यवस्थाओं का आलम, ग्राहकों ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर जताया रोष

3 वर्ष पहले
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कस्बे के आर्य समाज रोड स्थित एसबीआई बैंक शाखा में दूसरी शाखा के विलय के बाद बढ़ी ग्राहकों की मुसीबतें दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। नकदी जमा व भुगतान के लिए बैंक में आने वाले ग्राहक अव्यवस्थाओं को देख बैंक प्रबंधन को कोसते नजर आते हैं। बैंक में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर सोमवार को ग्राहकों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने बैंक के मुख्य गेट पर एकत्र होकर अव्यवस्थाओं को लेकर बैंक प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं किए जाने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी। गौरतलब है कि दो माह पूर्व आर्य समाज रोड स्थित बैंक शाखा में प्रबंधन ने मीराना तिराहा स्थित शाखा को विलय कर दिया। इससे बैंक में उपभोक्ताओं की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई हैं। जिसमें से अकेले 64 हजार तो बचत खाताधारक हैं। उपभोक्ताओं की संख्या दुगुनी होने की तुलना में संसाधन नहीं बढऩे से ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्यों के लिए मारा-मारा फिरना पड़ता है। विलय करने के समय उपभोक्ताओं सहित व्यापार महासंघ ने बैंक के उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित कर बैंक में अव्यवस्थाएं फैलने की बात कहते प्रबंधन को चेताया था।

लेकिन प्रबंधन ने हठधर्मिता दिखाते हुए विलय के अपने निर्णय को बरकरार रहा। ग्राहकों की संख्या दुगुनी होने से पहले से ही व्याप्त अव्यवस्थाएं अपने चरम पर पहुंच गई हैं। हालत ये है कि बैंक में आने वाला प्रत्येक ग्राहक अव्यवस्थाओं को देखकर बैंक प्रबंधन को खरीखोटी सुनाता है। इससे आए दिन ग्राहकों व बैंककर्मियों के बीच नोकझोंक के मामले सामने आ रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान बैंक में मौजूद ग्राहक राजेश गोयल, प्रदीप आर्य, हैप्पी गर्ग, डीपी वर्मा, बहादुरसिंह गुर्जर सीनियर स्कूल के प्रधानाचार्य डीपी वर्मा ने बताया कि विलय के बाद बैंक की हालत खराब हो गई है। ग्राहकों को घंटे लाइनों में लगने के बाद भी काम नहीं हो पाते हैं। वहीं कर्मचारी भी ग्राहकों को संतोषजनक जवाब नहीं देते है। परिसर में लगे एटीएम में नकदी नहीं होती है वहीं पास बुक प्रिंटर मशीन भी खराब पड़ी हुई है। इन दिनों शादी-विवाहों का सीजन चल रहा है तथा लोगों को नकदी की आवश्यकता है लेकिन बैंक उपभोक्ताओं को भुगतान नहीं कर पा रहा है। ग्राहकों ने बताया कि अगर यही हालात रहे तो व्यापक स्तर पर धरना प्रदर्शन व आंदोलन किया जाएगा। अधिकतर सरकारी कर्मचारियों सहित पेंशन के भी खाते इस बैंक में होने से लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बयाना. एसबीआई बैंक शाखा के मुख्य गेट पर नारेबाजी कर रोष जताते ग्राहक।

रोजाना हो रहे खाते बंद

बैंक में विलय के बाद बढ़ी अव्यवस्थाओं को लेकर परेशान ग्राहकों ने शाखा से अपने खातों को बंद कराकर दूसरी बैंकों में ले जाना शुरु कर दिया है। हालत ये है कि बैंक के पिछले लंबे समय से अच्छे खासे टर्नओवर वाले ग्राहक भी बैंक से अपने खाते बंद करा रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो रोजाना 8-10 खाते बंद कराने के आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।

ये सही बात है कि विलय के बाद से संख्या बढऩे से उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी अपने स्तर पर एक अतिरिक्त कैश काउंटर लगाया गया है। हमारे पास कर्मचारियों की कमी भी है। एक कर्मचारी आधार सीडिंग के कार्य में लगा रहता है। विलय करने का निर्णय बैंक प्रबंधन के उच्चाधिकारियों का रहा।

आरके बैरवा, मुख्य शाखा प्रबंधक एसबीआई बयाना

व्यापार महासंघ ने तो विलय के समय ही उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अव्यवस्थाओं को लेकर चेताया था। लेकिन बैंक प्रबंधन ने हठधर्मी दिखाते हुए विलय कर दिया। ग्राहकों की मुसीबतों को लेकर बैंक प्रबंधन उदासीन बना हुआ है। व्यापारियों को मजबूरी में अपने खाते बंद कराने पड़ रहे हैं। जिससे व्यापारियों को दूसरी जगह खाते खुलवाने पड़ रहे है।

विनोद सिंघल, अध्यक्ष, व्यापार महासंघ बयाना

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