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लू से पाैधे बचाने के लिए बांधी बोरियां, जरीकन से कर रहे हैं बूंद - बूंद सिंचाई

3 वर्ष पहले
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बायतु | बरसात के मौसम में लोग पौधे तो लगाते हैं। लेकिन पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं। कई विद्यालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों द्वारा पौधरोपण कर उनकी उचित देखभाल नहीं करने से पौधे पानी के अभाव में दम तोड़ देते है। शिक्षक ग्रीष्मकालीन अवकाशों में अपने घरेलू काम काज में व्यस्त हो जाते है और विद्यालय में लगे पौधे गर्मी व लू से जल जाते है। लेकिन कई शिक्षक गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी विद्यालय परिसर में लगाए पौधों की उचित देखभाल करते है। बायतु क्षेत्र के एक शिक्षक ने विद्यालय में लगे पौधों को पानी पिलाकर लू व गर्मी से बचाव किया जा रहा है। पंचायत समिति की माधासर ग्राम पंचायत की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय दर्जियों की ढाणी में लगे सैकड़ों पौधो को प्रधानाध्यापक रमेश कुमार भाखर द्वारा अनूठे तरीके से लू व भीषण गर्मी से बचाव किया जा रहा है। शिक्षक द्वारा विद्यालय में लगे पौधो को लू से बचाने के लिए बोरियों से ढककर पांच लीटर के केन लगाकर पानी पिलाया जा रहा है। शिक्षक की इस तरीके की एबीईईओ सुरेश कुमार गौड़ ने सराहना की है। शिक्षक द्वारा विद्यालय में पोषाहार के लिए आने वाले खाद्य तेल के पांच लीटर के खाली केन के पेंदे में छोटे छोटे छिद्र करके केन को पानी से भरकर पौधे के तने के पास रख दिया जाता है। इस केन से दिनभर बूंद बूंद पानी पौधे को मिलता रहता है जिससे भीषण गर्मी व लू में पौधे को पानी की जलापूर्ति होती रहती है। प्रधानाध्यापक रमेश कुमार भाखर ने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में यदि पौधो को समय पर पानी नहीं मिला तो पौधे भीषण गर्मी में जल जाएंगे।

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