‘शीरा मिलने से ब्यास दरिया का पानी दूषित होने को एक हादसा बताकर लोगों और प्रशासन का ध्यान भटकाने वाले मिल अधिकारियों ने खुद ही शराब बनाने के लिए स्टोर किए शीरे को ब्यास दरिया में पाइपों के जरिए डाला है। वहीं, हालांकि प्रशासन ने पिछले 20 दिन से बंद पड़ी मिल को सील कर दिया है लेकिन मिल के अंदर शराब की फैक्टरी अभी भी चल रही है।’ यह कहना है ब्यास दरिया का पानी दूषित होने ने लाखों का नुकसान उठाने वाले मछली के ठेकेदार सुशील कुमार का। उन्होंने बताया कि उनके पास सबूत है, उन्होंने वीडियो बनाई हुई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि मिल द्वारा पाइपों के जीरए शीरे को ब्यास दरिया में डाला जा रहा है। उन्होंने भास्कर को यह वीडियो उपलब्ध करवाई है।
ठेकेदार सुशील कुमार ने बताया कि हर साल मई माह में एरिया वाइज बोली होती है, जिसमें मछली पालन विभाग के सभी डायरेक्टर आते हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 17 साल से ठेका ले रहे हैं। उनके पास तलवाड़ा डैम 52 गेट से श्री हरगोबिंदपुर तक का ठेका है, जो उन्होंने 20 लाख रुपए में लिया हुआ है। उन्होंने कुछ महीनों पहले मछली पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को मिल द्वारा ब्यास दरिया का पानी गंदा करने की शिकायत दी थी। अब मिल का शीरा ब्यास दरिया में मिलाने से उनका 50 से 60 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।