- Hindi News
- National
- एक साल पहले की सरकारी रोक के बावजूद वैक्सीन बॉक्स में पारे वाले उपकरणों का हो रहा है प्रयोग
एक साल पहले की सरकारी रोक के बावजूद वैक्सीन बॉक्स में पारे वाले उपकरणों का हो रहा है प्रयोग
बच्चों को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से बचाने वाले टीके ही नौनिहालों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। इसका कारण है राजकीय अमृतकौर अस्पताल में निश्चित तापमान में रखे जा रहे वैक्सीन बॉक्स रेफ्रीजरेटर और डीप फ्रीज में राेक के बावजूद पारे वाले उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है। पारे(मर्करी) वाले उपकरण एक दाे नहीं बल्कि वैक्सीन बॉक्स के पांचों रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीज में तो काम लिया ही जा रहा है बल्कि वैक्सीनेशन कक्ष में पुराने पारे वाले खराब उपकरण भी रखे हैं। जिससे यहां टीके लगवाने आने वाले बच्चों और उनके परिजनों को भी खतरा बना हुआ है। गौरतलब है कि बुखार और बीपी जैसी बीमारियों को नापने के काम आने वाले पारे(मर्करी) वाले टेस्ट उपकरणों पर केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार रोक लगाए एक साल से अधिक हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार पारा सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर तंत्रिका तंत्र, पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने, फेफड़ों और किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है तथा प्राणघातक होता है। आम तौर पर इससे याददाश्त कम होने की शिकायत भी सामने आती रहती है। इस कारण पारे वाले उपकरणों के स्थान पर डिजिटल उपकरणों के प्रयोग के निर्देश दिए गए थे।
खुले में रखे है पारे वाले उपकरण : केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार 2020 तक पारे के प्रयोग पर पूर्णतया रोक लग जाएगी। ऐसे में पारे के स्वास्थ्य पर होने वाले विपरीत प्रभाव को देखते हुए पारे वाले उपकरणों पर तो राेक लगाई गई है और धीरे धीरे इसके उपयाेग को कम करने के निर्देश दिए गए हैं। वैक्सीन को सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए वहां पारे के उपयोग की छूट दिए जाने की बात कही जा रही है लेकिन वैक्सीनेशन कक्ष में पुराने उपकरण भी खुले में रखे हैं जिससे नौनिहालों के स्वास्थ्य पर खतरा है।
बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण 2016 के तहत पारे वाले उपकरणों को धीरे धीरे हटाया जा रहा है। वैक्सीन बॉक्स और फ्रीज में भी डिजिटल थर्मामीटर का उपयोग किया जाना है। अगर पारे वाले उपकरण काम में लिए जा रहे हैं तो उन्हें एक एक कर हटाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पुराने खराब थर्मामीटर के नियमानुसार बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण 2016 के अनुसार निस्तारित करने के निर्देश दिए जाएंगे।” डॉ. रामलाल, , आरसीएचओ
ब्यावर. डीप फ्रीज में रखा थर्मामीटर। (गोले में)