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डीटीओ दफ्तर में एसीबी टीम ने सीज कमरे खोलकर खंगाली फाइलें

3 वर्ष पहले
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जिला परिवहन कार्यालय ब्यावर में एसीबी की टीम ने एक बार फिर जांच-पड़ताल शुरू की। इस दौरान टीम ने पूर्व में सीज किए गए कमरे को खोलकर उसमें रखी 4 हजार फाइलों को खंगाला। प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों ने माना कि डीटीओ ब्यावर में ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो गया जिन्हें अन्य प्रांतों से खरीदने के बाद किसी अन्य जिला परिवहन कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना था। साथ ही इस संबंध में सेल्स टेक्स विभाग को भी जानकारी नहीं दी गई। एसीबी की 10 सदस्यीय टीम सीआई पारसमल के नेतृत्व में देर शाम तक इस जांच में जुटी रही।

इस संबंध में एसीबी की टीम ने गत 22 फरवरी को जिला परिवहन कार्यालय ब्यावर में दबिश दी थी। इस दौरान टीम ने दफ्तर में मौजूद अन्य प्रांतों से खरीदे गए वाहनों के यहां रजिस्ट्रेशन होने संबंधी फाइलें, एसाइनमेंट के तहत हुए कार्यवाही संबंधी दस्तावेज जांच के लिए अपने कब्जे में लिए। इसके अलावा मौके पर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच के लिए डीवीआर को भी अपने साथ ले गई थी। अन्य प्रांतों से खरीदी गई गाडिय़ों संबंधी 73 फाइलों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया था। सीआई पारसमल के नेतृत्व में टीम में श्यामप्रकाश इंदौरिया, भरत सिंह, सर्वेश्वर सिंह, मनीष कुमार सहित डीटीओ अजमेर के कर्मचारी और सेल्स टेक्स विभाग अजमेर के अधिकारी शामिल थे।

ब्यावर. डीटीओ टीसी मीणा से पूछताछ करती एसीबी की टीम।

एसीबी जुटी है इस जांच में...

अन्य प्रांतों से कितने वाहन खरीदे गए और उन्हें किस जिले में पंजीयन के लिए एनओसी मिली थी।

सेल्स टैक्स विभाग से एनओसी मिले बिना ही ऐसे वाहनों का किस आधार पर पंजीयन हो गया।

एचडीएच लॉजिस्टिक फर्म ने ब्यावर में ही ऐसे सभी वाहनों को पंजीयन क्यों और किस आधार पर कराया।

एसाइनमेंट के तहत ऐसे अन्य प्रांत के कितने वाहन हैं जिन्हें नियमानुसार किसी अन्य जिले में रजिस्ट्रेशन कराना था जबकि उनका रजिस्ट्रेशन कर दिया गया डीटीओ ब्यावर में।

- सरकार को इस अनियमितता से कितने राजस्व का नुकसान हुआ

3 महीने पहले किया था कमरा सीज

एसीबी अजमेर की टीम ने जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में 22 फरवरी को 7 बोरों में भरकर एक कमरे में रखकर उसे सील-चपड़ी लगाकर सीज कर दिया था। जिसे ब्यावर पहुंची टीम ने खोलकर उसमें रखी पत्रावलियों की जांच-पड़ताल शुरू की। डीटीओ ब्यावर में एसाइनमेंट संबंधी ऐसे वाहनों का पंजीयन विभाग की गाइड लाइन मुताबिक ही करना बताया जा रहा है। ऐसे वाहन के स्वामी द्वारा प्रादेशिक जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1999 के नियम 47 के तहत वाहन पंजीयन के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाता है एवं प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज नियम सम्मत पाये जाते है तो ऐसे वाहन को नियमानुसार पंजीकृत कर वाहन को पंजीयन अनुक्रमांक जारी कर दिया जाए।

यहां बरती अनियमितता : हालांकि विभाग की गाइड लाइन में यह भी स्पष्ट किया गया था पंजीयन अनुक्रमांक आवंटित करने के पश्चात वाहन स्वामी को पंजीयन प्रमाण पत्र नही दिया जाए जब तक वाहन स्वामी द्वारा वाणिज्यिक कर तब तक विभाग के सक्षम अधिकारी से वेट एवं एंट्री टैक्स के संबंध में कर चुकता प्रमाण पत्र प्राप्त कर कार्यालय में प्रस्तुत नही किया जाता है। बताते हैं कि यही चूक डीटीओ के लिए भारी पड़ सकती है। इसी को आधार मानकर ही टीम भी अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।

एसीबी टीम ने 22 फरवरी को कार्रवाई के दौरान 7 बोरों में भरकर एसाइनमेंट संबंधी फाइलों को एक कमरे में रखकर उसके सीज कर दिया था। जिनकी जांच-पड़ताल का काम मंगलवार से शुरू किय। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ऐसे कुछ वाहन जिन्हें अन्य प्रांतों में खरीदने के बाद एनओसी के आधार पर अन्य जिलों की बजाय ब्यावर में पंजीयन कर दिया गया। जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। पारसमल पंवार, सीआई एसीबी अजमेर

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