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किल्लत के बाद भी नहीं समझी पानी की कीमत

3 वर्ष पहले
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दो लाख से अधिक आबादी के लिए 26 एमएलडी पानी की जरूरत वाले शहर को करीब 24 एमएलडी पानी से ही गुजारा करना पड़ता है। उसके बावजूद हालत यह है कि विभागीय स्तर पर ही पानी की बर्बादी हो रही है मगर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

मुख्य पेयजल लाइन हो या फिर शहर में स्थित विभिन्न टंकियों को भरने के लिए सप्लाई लाइन, इन पर लगे वॉल्व से पेयजल निरंतर बहता रहता है। भास्कर जल मित्रों ने माना कि शहर में स्थित लाइनों पर लगे वॉल्व से व्यर्थ बहते पानी को रोकने के विभाग को पुख्ता इंतजाम करने चाहिए या फिर ऐसे प्रबंध हो कि अमृतरूपी इस पेयजल का सदुपयोग हो सके।भास्कर जल मित्र प्रमोद शर्मा ने बताया कि कॉलेज रोड स्थित लाइन पर लगे वॉल्व से पेयजल निरंतर बहता रहता है, इसकी वजह है वॉल्व का लीकेज होना। इसी प्रकार भास्कर जल मित्र सुरेंद्र रावत ने बताया कि छावनी लिंक रोड से गुजरने वाली लाइन पर लगे वॉल्व हो या फिर ज्वाइंट इनमें भी पानी निरंतर बहता रहता है। जबकि कई क्षेत्रों में गर्मियों में तो हालात यह हो जाते हैं सप्लाई के समय महज 10 से 12 घड़े ही पानी आता है। कम प्रेशर की और कम समय सप्लाई के चलते कुछ लोग बूस्टर के जरिये पानी खींचते हैं।

यही वजह है कि आगे लाइन से जुड़े कनेक्शन में पर्याप्त प्रेशर से पेयजल सप्लाई नहीं होता है। विभाग को गर्मियों के मौसम में लोग बूस्टर से सप्लाई के समय पानी न खींचे इसके भी पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। जिससे उन लोगों को राहत मिल सके जो नियमानुसार सप्लाई के समय पानी भरते हैं।

ब्यावर. कॉलेज रोड स्थित पेयजल लाइन पर लगे वॉल्व के लीकेज होने की वजह से पानी इतना पानी बहता है कि लोग जितना पानी भरते हैं उससे कहीं ज्यादा व्यर्थ चला जाता है।

ग्लेन पैकिंग कटने से होती है लीकेज की समस्या

इस समस्या को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में जहां कहीं भी मुख्य पाइप लाइन है या फिर सप्लाई लाइन। वहां वॉल्व के अंदर लगी ग्लेन पैकिंग एक निश्चित समय के अंतराल में कट जाती है इसी वजह से वॉल्व से पानी लीकेज होना शुरू हो जाता है। इसके लिए विभाग की ओर से नियुक्त टी-मैन जो रोजाना वॉल्व ऑपरेट करता है वह भी वॉल्व पर नजर रखता हैं। वॉल्व के अंदर लगी ग्लेन पैकिंग ही पानी को रोकती है। वॉल्व के घूमने के साथ ही एक निश्चित समय अंतराल बाद ग्लेन पैकिंग जो मिक्स मैटेरियल की बनी होती है वह कटने लगती है। टी-मैन की रिपोर्ट या फिर विभाग को वॉल्व के लीकेज की शिकायत मिलते ही उसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

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